पीओके में पाक फौज की बर्बरता, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी, छह की मौत

पाकिस्तान के अधिकृत कश्मीर (पीओके) में गत कुछ दिनों से जारी प्रदर्शन सुरक्षा बलों के खामोश रुख के बावजूद तेज होते चले गए और बुधवार को घटनाक्रम हिंसक रूप ले लिया। स्थानीय सूत्रों और तस्वीरों-वीडियो के आधार पर पता चला है कि रेंजर्स और पुलिस ने भीड़ पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम छह लोग मारे गए तथा कई नागरिक घायल हुए हैं। घटना के कई दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आए हैं जिनमें सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस के गोले चलाते और लाठीचार्ज करते दिखाया गया है।
प्रदर्शनकारी करीब दो वर्षों से विभिन्न आर्थिक-सामाजिक मांगों की पैरवी कर रहे हैं। इस सप्ताह उनके द्वारा प्रस्तुत 38-बिंदीय मांगपत्र में आत्मनिर्णय का अधिकार, रियायती दरों पर आटा और बिजली, सार्वजनिक सेवाओं की बहाली, आरक्षित सीटों से संबंधित पुनर्रचना और बुनियादी ढाँचे के कामों की पूर्णता जैसी माँगें शामिल हैं।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा बलों ने उपद्रव रोकने के नाम पर इंटरनेट, मोबाइल और लैंडलाइन सेवाएँ बंद कर दीं तथा कई हिस्सों में कर्फ्यू-सदृश स्थितियाँ लागू कर दी गईं। मुजफ्फराबाद और अन्य इलाकों में फौजी टुकड़ियाँ तैनात कर दी गईं और सड़कों पर बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी दिखाई दिए।
एक घटना में मीरपुर जिले के दुदयाल क्षेत्र के लोगों ने मंगलवार शाम एक मृतक की दफन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया और चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें मान्य नहीं होंगी अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAC) के नेतृत्व में मीरपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद में विशाल रैलियाँ निकाली गईं, जिनमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए और सरकार के ख़िलाफ़ नाराज़गी प्रकट की गई।
जम्मू-कश्मीर नेशनल अलायंस के चेयरमैन महमूद कश्मीरी ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सरकार सीमा-क्षेत्रों में सैनिक तैनात कर पीओके को रणनीतिक आधार में बदलने की चाल चला रही है। उन्होंने कहा कि हथियारों की तैनाती और सैनिक गतिविधियाँ स्थानीय आबादी पर दबाव बढ़ा रही हैं और यदि फौज वापस नहीं ली गई तो व्यापक विरोध होगा।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि दो साल पहले की आर्थिक-दिक्कतों और तब से लागू निहित समझौतों के पूरा न होने से जुड़ी है। आरंभ में किराये की कीमतों, बिजली कटौती और आटे की आपूर्ति को लेकर उठे विवाद धीरे-धीरे व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक माँगों में बदल गए। प्रदर्शनकारी अब संहिताबद्ध मांगपत्र के माध्यम से इन मुद्दों के स्थायी समाधान की माँग कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा के नज़रिए से खाड़ी में हाल की घटनाओं के साथ-साथ पीओके में हालात तनावपूर्ण बने रहने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारियों ने फिलहाल स्थिति का नियंत्रण बनाए रखने के प्रयास तेज कर दिए हैं और मृतकों-घायलों के परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर राहत जुटाने की कोशिशें जारी हैं।
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