शिवसेना में सियासी घमासान तेज, राउत और शिंदे गुट में जुबानी जंग

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना (UBT) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के बीच जारी तनातनी अब खुलकर जुबानी जंग में बदल गई है। सांसदों के कथित पलायन और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की अटकलों के बीच दोनों खेमों से तीखे बयान सामने आ रहे हैं।
राउत का सोशल मीडिया पर हमला
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक इन्फोग्राफिक साझा करते हुए तीखी टिप्पणी की। पोस्ट में लिखा था कि “कुछ लोग कुत्ते तो होते हैं, लेकिन वफादार नहीं होते।” राउत ने इस पोस्ट के साथ “जय महाराष्ट्र!” भी लिखा।
उनकी यह टिप्पणी एकनाथ शिंदे के हालिया बयान के जवाब के रूप में देखी जा रही है।
शिंदे का उद्धव गुट पर पलटवार
एक सार्वजनिक संबोधन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट पर निशाना साधते हुए कहा था कि “कुछ लोग लगातार भौंकते रहते हैं, लेकिन असली ताकत शेर में होती है।” उन्होंने अपने गुट को बालासाहेब ठाकरे की असली राजनीतिक विरासत से जुड़ा बताया था और दावा किया कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में मजबूत स्थिति में है।
छह सांसदों के अलग होने की अटकलें
विवाद की पृष्ठभूमि में उस समय और तेजी आई जब यह खबरें सामने आईं कि शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने हाल ही में दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक से दूरी बनाई। इसके बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि ये सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।
इसी बीच ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम से चल रही चर्चाओं ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।
राउत की कार्रवाई की चेतावनी
संजय राउत ने कहा है कि अनुपस्थित सांसदों के खिलाफ पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि संबंधित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और आगे की प्रक्रिया जारी है।
राउत ने यह भी कहा कि पार्टी इन सांसदों की अयोग्यता की मांग को लेकर हर संभव कदम उठाएगी और लोकसभा अध्यक्ष से नियमों के अनुसार कार्रवाई की उम्मीद है।
शिंदे गुट में जाने के दावों से बढ़ी हलचल
शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। उन्होंने दावा किया कि छह सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और उनके साथ जाने को तैयार हैं।
फिर गहराया शिवसेना संकट
इस पूरे घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे गुट को एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट की ओर धकेल दिया है। 2022 के विभाजन के बाद से शुरू हुआ शिवसेना का आंतरिक संघर्ष अब भी जारी है और लगातार नए मोड़ ले रहा है।
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