राधाकृष्णन ने ली उपराष्ट्रपति पद की शपथ; समारोह में धनखड़ भी आए नजर

देश के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में पद की शपथ दिलाई। राजग उम्मीदवार राधाकृष्णन ने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से हराकर उपराष्ट्रपति पद का चुनाव जीता था। उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को हुआ, जो कि जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई को अचानक इस्तीफा देने के बाद आयोजित हुआ था।
उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया कि राधाकृष्णन के इस्तीफे के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
राधाकृष्णन की उपराष्ट्रपति पद की यात्रा असाधारण रही है। उन्होंने छात्र आंदोलन से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से सक्रिय राजनीति में कदम रखा। भाजपा में संगठनात्मक भूमिका निभाने के दौरान उन्होंने तमिलनाडु प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में लंबी रथ यात्राएं कीं, जिनमें उन्होंने देश की नदियों को जोड़ना, आतंकवाद उन्मूलन, समान नागरिक संहिता लागू करना, अस्पृश्यता उन्मूलन और मादक पदार्थों से लड़ने जैसे मुद्दों को उठाया।
वह ओबीसी समुदाय कोंगु वेल्लार (गाउंडर) से हैं और उनकी शादी सुमति से हुई है। उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। राधाकृष्णन ने पिछले साल जुलाई में महाराष्ट्र के राज्यपाल का पद संभाला था, जबकि इससे पहले फरवरी 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उन्होंने तेलंगाना और पुडुचेरी में अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला।
सार्वजनिक जीवन की शुरुआत उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से की थी और 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति में शामिल हुए। 1996 में उन्हें तमिलनाडु भाजपा का सचिव नियुक्त किया गया और 1998 व 1999 में कोयंबटूर से दो बार लोकसभा सदस्य चुने गए। सांसद रहते हुए वह संसदीय स्थायी समिति (कपड़ा मंत्रालय) के अध्यक्ष और स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जांच के लिए बनाई गई विशेष संसदीय समिति के सदस्य भी रहे।
इसके अलावा, उन्होंने 2004 में संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया और ताइवान जाने वाले पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य रहे। 2016 में कोच्चि स्थित कॉयर बोर्ड के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने नारियल रेशे के निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की।
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