भारत बढ़ाएगा अमेरिका से एलपीजी आयात, खाड़ी देशों पर निर्भरता होगी कम
By News Desk — July 6, 2026

HIGHLIGHTS
- भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए अमेरिका से एलपीजी आयात दोगुना करने की योजना बना रहा है।
- खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार वैकल्पिक देशों और सप्लाई स्रोतों पर भी काम कर रही है।
- 30 दिनों का रणनीतिक एलपीजी भंडार बनाने की तैयारी की जा रही है ताकि किसी भी संकट में आपूर्ति बाधित न हो।
Author: — Dainik Dehat
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एलपीजी आयात के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियां अमेरिका से खरीदी जाने वाली एलपीजी की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर रही हैं, ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को घटाया जा सके।
अमेरिकी एलपीजी आयात में हो सकती है बड़ी बढ़ोतरी
वर्तमान में भारत हर साल करीब 22 लाख टन एलपीजी अमेरिका से आयात करता है। अब इस मात्रा को बढ़ाकर लगभग दोगुना करने की योजना पर काम चल रहा है। इसके साथ ही तेल कंपनियां अल्जीरिया समेत अन्य देशों से भी आपूर्ति के विकल्प तलाश रही हैं।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान मिला बड़ा सहारा
पिछले वर्ष हुए समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से एलपीजी आयात शुरू किया था। पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति बाधित होने के दौरान अमेरिकी एलपीजी भारत के लिए अहम विकल्प बनकर सामने आई। इससे घरेलू गैस आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली।
रणनीतिक भंडार बनाने की दिशा में कदम
केंद्र सरकार तेल कंपनियों को एलपीजी का 30 दिन का रणनीतिक भंडार तैयार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसका उद्देश्य किसी भी वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधा की स्थिति में देश की जरूरतों को सुरक्षित रखना है। यह भंडार मौजूदा स्टॉक व्यवस्था के अतिरिक्त होगा।
तेजी से बढ़ी अमेरिकी हिस्सेदारी
हाल के महीनों में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी आपूर्ति ने भारत को वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराए हैं, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।
अन्य देशों से भी बढ़ रही खरीद
अमेरिका के अलावा भारत अर्जेंटीना, नाइजीरिया, मलेशिया और अन्य देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाने के विकल्पों पर काम कर रहा है। इससे आपूर्ति नेटवर्क अधिक संतुलित होगा और किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह रणनीति भविष्य में वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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