राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: पंचायत भवन के नाम पर अवैध पेड़ कटाई, अफसर दंडित

जयपुर। पंचायत भवन के निर्माण के दौरान बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति और तय सीमा से कई गुना अधिक पेड़ों की कटाई को राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर प्रशासनिक चूक करार दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में तत्कालीन दौसा जिले के सिकराय एसडीएम सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने यह आदेश विमला देवी द्वारा दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि संबंधित दोषी अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूली जाए।
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि सार्वजनिक उपयोग के भवनों का निर्माण जरूरी हो सकता है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। विकास योजनाएं इस प्रकार तैयार की जानी चाहिए कि मौजूदा वृक्षों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।
अनुमति 25 पेड़ों की, कटे 150 से अधिक
याचिका में बताया गया कि ग्राम पंचायत पाटन के भवन निर्माण के लिए तत्कालीन एसडीएम ने बिना अधिकार वृक्ष कटाई की अनुमति दी थी। अनुमति केवल 17 बड़े, 8 छोटे और मध्यम आकार के कुल 25 पेड़ों तक सीमित थी, जबकि मौके पर 150 से अधिक पेड़ काट दिए गए।
सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि पंचायत भवन के बदले अन्य स्थान पर भूमि चिन्हित कर करीब 500 पौधे लगाए गए हैं। इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी अन्य स्थान पर पौधारोपण करना, बड़े पैमाने पर की गई अवैध कटाई को जायज नहीं ठहरा सकता।
रिकॉर्ड से सामने आई वास्तविक स्थिति
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार के हलफनामे में केवल 25 पेड़ों की कटाई का उल्लेख किया गया, जबकि दस्तावेजी रिकॉर्ड से स्पष्ट होता है कि संबंधित क्षेत्र घने वृक्षों से आच्छादित था और वहां व्यापक स्तर पर अवैध कटाई हुई। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ आदेश देने वाले अधिकारी ही नहीं, बल्कि उस आदेश को लागू करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए थी।
जुर्माने की राशि पौधों के संरक्षण में लगेगी
अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि जनहित याचिका दायर होने के बाद वर्तमान एसडीएम द्वारा नए पौधे लगाए गए हैं, जो अब विकसित हो चुके हैं। इनकी तस्वीरें अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गईं। कोर्ट ने इस प्रयास की सराहना करते हुए निर्देश दिए कि इन पौधों की नियमित निगरानी की जाए, उन्हें सुरक्षित रखा जाए और भविष्य में मजबूत वृक्ष के रूप में विकसित किया जाए।
साथ ही आदेश दिया गया कि दोषी अधिकारियों से वसूली गई जुर्माने की राशि पौधों के रखरखाव और सुरक्षा में खर्च की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर वृक्ष रक्षक भी तैनात किए जाएं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.