जयपुर आतंकी नेटवर्क केस में बबीता धाकड़ भेजी गई जेल

जयपुर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कथित जासूसी और आतंकी नेटवर्क मामले की आरोपी बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को शनिवार को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया। उसे अपर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-11, जयपुर महानगर द्वितीय की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए गए। कोर्ट परिसर में मीडिया के सामने वह अपना चेहरा छिपाती नजर आई।
राजस्थान एटीएस ने बबीता धाकड़ को जयपुर के वाटिका क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई, जिसमें जांच एजेंसियों के अनुसार कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में सामने आए गंभीर आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से कथित तौर पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में थी। इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या उसे किसी आत्मघाती गतिविधि के लिए तैयार किया जा रहा था, हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर्स उसे ऑनलाइन माध्यम से निर्देश और प्रशिक्षण दे रहे थे। एजेंसियां अब उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि आरोपी ने इंटरनेट पर आत्मघाती हमलों से जुड़ी जानकारी भी खोजी थी। एजेंसियां इसे मामले से जुड़ा अहम पहलू मानकर गहन जांच कर रही हैं।
नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों की जांच जारी
एटीएस यह भी पता लगाने में जुटी है कि उसके संपर्क में और कौन लोग शामिल थे और क्या किसी स्थानीय नेटवर्क की भूमिका रही है। फिलहाल आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में जेल में है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहन छानबीन कर रही हैं।
डंकी रूट और सोशल मीडिया लिंक की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह भी सामने आया है कि आरोपी के पास वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे और वह कथित रूप से अवैध “डंकी रूट” के जरिए पाकिस्तान जाने की योजना बना रही थी।
इसके अलावा, यह भी जांच का हिस्सा है कि सोशल मीडिया के जरिए उसे कथित तौर पर भारतीय सेना से जुड़ी जानकारी हासिल करने और हनीट्रैप जैसी गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए गए थे।
कानूनी पक्ष
आरोपी के वकील भगवान सहाय के अनुसार, उसके खिलाफ यूएपीए की धारा 38 और 39 के तहत मामला दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण जांच को गोपनीय रखा गया है। एटीएस ने उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, कॉल डिटेल्स और डिजिटल गतिविधियों की भी विस्तृत जांच की है।
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