E20 पेट्रोल को लेकर अफवाहों पर विराम, डीलर्स एसोसिएशन ने दावों को बताया भ्रामक

HIGHLIGHTS
- 1 अप्रैल 2026 से सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है।
- पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने सोशल मीडिया पर फैल रहे इंजन खराब होने के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी गाड़ियों में लंबे समय बाद कुछ पुर्जों पर असर की संभावना जताई गई है, लेकिन अभी तक किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
भारत में 1 अप्रैल 2026 से सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कई तरह की आशंकाएं और दावे तेजी से फैल रहे हैं। इन चर्चाओं के बीच उत्कल पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव संजय लाठ ने स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैल रही अधिकांश बातें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिसमें E20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन के इंजन को नुकसान हुआ हो।
व्यापक सप्लाई पहले से शुरू
संजय लाठ के अनुसार, E20 पेट्रोल की आपूर्ति अक्टूबर-नवंबर 2025 से ही बड़े पैमाने पर शुरू कर दी गई थी। इसके बाद सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से इसे सभी सरकारी और निजी तेल विपणन कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करना है।
इंजन खराब होने के दावों को बताया गलत
डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर अब तक E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से किसी भी वाहन में इंजन फेल होने या गंभीर तकनीकी समस्या की कोई शिकायत नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे दावों को बिना आधार की अफवाह बताया गया है।
पुरानी गाड़ियों पर संभावित असर, लेकिन कोई केस नहीं
कुछ शुरुआती तकनीकी अध्ययनों में यह संभावना जताई गई थी कि बहुत पुरानी गाड़ियों में लंबे समय तक उपयोग के बाद कुछ रबर पार्ट्स पर हल्का असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई वास्तविक मामला सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि E20 पेट्रोल से वाहनों को व्यापक नुकसान हो रहा है।
अफवाहों से सावधान रहने की अपील
एसोसिएशन ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारियों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक व प्रमाणित स्रोतों से मिली जानकारी को ही सही मानें।
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