पर्यटन स्थल नहीं हैं मंदिर, पूजा करने वाले ही जाएं: आलोक कुमार

HIGHLIGHTS
- विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि हिंदू धार्मिक स्थल केवल घूमने-फिरने की जगह नहीं, बल्कि आस्था और पूजा के केंद्र होते हैं।
- उन्होंने कहा कि मंदिरों की अपनी सदियों पुरानी मर्यादाएं और धार्मिक नियम होते हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए।
- ऐसे स्थानों पर वही लोग जाएं, जो भगवान में आस्था रखते हैं और पूजा के उद्देश्य से आते हैं।
- पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल सांस्कृतिक या मनोरंजन का आयोजन…
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि हिंदू धार्मिक स्थल केवल घूमने-फिरने की जगह नहीं, बल्कि आस्था और पूजा के केंद्र होते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की अपनी सदियों पुरानी मर्यादाएं और धार्मिक नियम होते हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए। ऐसे स्थानों पर वही लोग जाएं, जो भगवान में आस्था रखते हैं और पूजा के उद्देश्य से आते हैं।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल सांस्कृतिक या मनोरंजन का आयोजन नहीं है, बल्कि माता अंबा की आराधना से जुड़ी एक पवित्र परंपरा है। परंपरागत रूप से गरबा दीप प्रज्वलन और नंगे पैर देवी की उपासना के साथ किया जाता है। इसलिए इसकी धार्मिक भावना और परंपरा को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में सभी धर्मों के लोगों को आमंत्रित करना उचित नहीं माना जाना चाहिए।
अन्य धर्मों के उदाहरण दिए
आलोक कुमार ने कहा कि इस्लाम में मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों पर गैर-मुस्लिमों के प्रवेश की अनुमति नहीं होती। इसी तरह ईसाई और अन्य धार्मिक परंपराओं में भी अपने-अपने नियम हैं। विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि हर धर्म को अपनी आस्था और रीति-रिवाजों के अनुरूप व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है।
जनसांख्यिकी बदलाव पर चिंता
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के कुछ इलाकों में जनसंख्या संरचना में बदलाव देखने को मिल रहा है। विहिप की मांग है कि हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में किसी विशेष समुदाय की बढ़ती बसावट की जांच की जाए कि कहीं यह किसी संगठित योजना का हिस्सा तो नहीं है।
अंत में उन्होंने कहा कि धार्मिक विश्वास, सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखते हुए समाज और सरकार को संविधान के दायरे में रहकर मिलकर काम करना चाहिए।
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