कतर के अमीर से मिले ट्रंप, बोले- ईरान में अमेरिका एक भी पैसा निवेश नहीं कर रहा

फ्रांस के एवियन शहर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के बीच अहम बैठक हुई। इस दौरान ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया और हालिया समझौते को लेकर चर्चा की गई। बैठक में ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका ईरान में किसी भी तरह का वित्तीय निवेश नहीं कर रहा है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ एक समझौता हो चुका है और अब इसका अगला चरण आगे बढ़ेगा, जो उनके अनुसार अपेक्षाकृत आसान होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका की नीति साफ है और ईरान में आर्थिक निवेश की कोई बाध्यता नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका के पास किसी भी समय कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित है।
उन्होंने दोहराया कि अमेरिका का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ट्रंप के अनुसार, यदि ईरान इस दिशा में आगे बढ़ता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि आगे संबंध सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
ईरान को लेकर अपने रुख पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह सत्ता परिवर्तन (regime change) की नीति में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान उन्हें ईरानी पक्ष “व्यावहारिक और समझदार” लगा और संवाद अपेक्षाकृत सकारात्मक रहा।
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी ट्रंप ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में भारी जनहानि हो रही है और दोनों पक्षों को जल्द समझौते की दिशा में बढ़ना चाहिए। ट्रंप ने दावा किया कि अब तक लाखों सैनिकों की जान जा चुकी है और स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि वे इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहे हैं और जल्द समाधान की उम्मीद है। ट्रंप के अनुसार, यह युद्ध अब तक के सबसे विनाशकारी संघर्षों में से एक बनता जा रहा है।
ईरान समझौते के औपचारिक पहलू पर ट्रंप ने बताया कि अंतिम हस्ताक्षर के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने इसे क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इससे वैश्विक व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
साथ ही ट्रंप ने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) की आलोचना दोहराई और कहा कि पहले का समझौता ईरान को रोकने में प्रभावी नहीं था। उन्होंने 2018 में अमेरिका के उस समझौते से बाहर होने के फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें कई वैश्विक शक्तियां शामिल थीं।
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