होर्मुज से रवाना होने के लिए तैयार दो भारतीय टैंकर, ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ा तनाव

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के दो एलपीजी टैंकर जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की तैयारी कर रहे हैं। यह दोनों जहाज फिलहाल खाड़ी के पानी में खड़े हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के माध्यम से आयात करता है। अगर होर्मुज मार्ग असुरक्षित हुआ, तो पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और व्यापार एवं शिपिंग गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा।
क्यों रुकी जहाजों की आवाजाही?
पिछले 24 घंटों में कोई भी कच्चा तेल ले जाने वाला जहाज इस मार्ग से नहीं गुजरा। जानकारी के मुताबिक, एक खाली तेल टैंकर, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था, वापस ईरान की तरफ लौट गया। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित खतरों के कारण शिपिंग कंपनियां फिलहाल सावधानी बरत रही हैं।
पूरी दुनिया क्यों है चिंतित?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल का लगभग 20 प्रतिशत परिवहन होता है। अगर इस क्षेत्र में कोई बड़ा संघर्ष या हमला होता है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है?
यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और हिंद महासागर को जोड़ता है। इसका वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में बड़ा महत्व है और यहां की हर हलचल वैश्विक स्तर पर असर डालती है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष का हाल
यह संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमले किए। इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई। उनके बाद ईरान के नए नेता मोजतबा खामेनेई ने चेतावनी दी है कि ईरान अपने मारे गए लोगों का बदला लेगा और होर्मुज मार्ग को बंद रखने की नीति जारी रखेगा। साथ ही पड़ोसी देशों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी बंद करने को कहा गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की तैयारी और कूटनीतिक प्रयासों से ऊर्जा परिवहन सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिल रही है।
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