अमेरिका में डॉक्टरों के आव्रजन आवेदनों पर लगी रोक आंशिक रूप से हटाई गई

HIGHLIGHTS
- अमेरिका ने डॉक्टरों से जुड़े आव्रजन आवेदनों पर लगाई गई अस्थायी रोक को आंशिक रूप से हटा दिया है, हालांकि अन्य आवेदकों के मामलों में अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।
- इस फैसले के बाद उन डॉक्टरों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है जिनके ग्रीन कार्ड और वीजा आवेदन लंबे समय से लंबित थे।
- लीबिया के चिकित्सक फैसल अलघौला, जो अमेरिका के इंडियाना राज्य में करीब एक हजार मरीजों का इलाज करते हैं, इस फैसले से प्रभावित प्रमुख मामलों में से एक हैं।
- उन्हें अपना ग्रीन कार्ड नवीनीकरण कराना है, ताकि वे अपनी सेवाएं जारी रख स…
अमेरिका ने डॉक्टरों से जुड़े आव्रजन आवेदनों पर लगाई गई अस्थायी रोक को आंशिक रूप से हटा दिया है, हालांकि अन्य आवेदकों के मामलों में अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। इस फैसले के बाद उन डॉक्टरों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है जिनके ग्रीन कार्ड और वीजा आवेदन लंबे समय से लंबित थे।
लीबिया के चिकित्सक फैसल अलघौला, जो अमेरिका के इंडियाना राज्य में करीब एक हजार मरीजों का इलाज करते हैं, इस फैसले से प्रभावित प्रमुख मामलों में से एक हैं। उन्हें अपना ग्रीन कार्ड नवीनीकरण कराना है, ताकि वे अपनी सेवाएं जारी रख सकें। लेकिन पहले लगी रोक के कारण उनका आवेदन रुका हुआ था। अगर उनका आवेदन खारिज हो जाता है तो उनका मौजूदा वीजा सितंबर में समाप्त हो सकता है।
हाल ही में अमेरिकी प्रशासन ने डॉक्टरों के वीजा और ग्रीन कार्ड मामलों की समीक्षा फिर से शुरू करने की अनुमति दी है। इससे अलघौला जैसे मामलों में आगे प्रक्रिया बढ़ने की संभावना है, हालांकि अंतिम मंजूरी की कोई गारंटी नहीं है। डॉक्टर संगठनों और आव्रजन वकीलों का कहना है कि यह कदम लंबे समय से चल रही डॉक्टरों की कमी के बीच बेहद जरूरी था, खासकर ग्रामीण और कम सुविधाओं वाले इलाकों में।
अलघौला का कहना है कि पल्मोनोलॉजिस्ट और आईसीयू विशेषज्ञों की कमी के कारण कई मरीजों को इलाज के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। उनका मानना है कि विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टर इस कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि, आव्रजन विशेषज्ञों का कहना है कि प्रक्रिया फिर से शुरू होने का मतलब केवल इतना है कि मामलों की दोबारा समीक्षा होगी, लेकिन इससे मंजूरी की गारंटी नहीं बनती। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित एजेंसियां लंबित आवेदनों को समय पर निपटा पाएंगी या नहीं।
इसी बीच, अलघौला जैसे कई डॉक्टरों में असुरक्षा की भावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां दस्तावेज़ नवीनीकरण के दौरान लोगों को हिरासत में लिया गया। इसी कारण वे अभी भी इंटरव्यू और आगे की प्रक्रिया को लेकर आशंकित हैं। वे 2016 से अमेरिका में रह रहे हैं।
दूसरी ओर, यह सख्ती अभी भी कई देशों पर लागू है। 39 देशों के हजारों आवेदक इस प्रतिबंध से प्रभावित हैं, जिनमें ईरान, अफगानिस्तान और वेनेजुएला के लोग शामिल हैं। इस वजह से कई लोग काम, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सुविधाओं से वंचित हैं।
यह नीतियां ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति का हिस्सा मानी जा रही हैं, जिसके तहत कई देशों के आवेदनों की अतिरिक्त जांच की गई थी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा और स्क्रीनिंग प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
एक हालिया घटना के बाद आव्रजन नियमों में और सख्ती बढ़ा दी गई थी, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद अधिकारियों ने आवेदनों की जांच और तेज निर्णय प्रक्रिया पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन नीतियों का असर केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों प्रवासियों के जीवन और करियर पर भी पड़ रहा है। कई डॉक्टरों के आवेदन या तो लंबित हैं या पहले ही अस्वीकृत किए जा चुके हैं।
कुछ मामलों में डॉक्टरों ने अदालत का रुख भी किया है। ईरान की एक डॉक्टर का मामला इसका उदाहरण है, जिनका आवेदन लंबित रहने के बाद अदालत के हस्तक्षेप से दोबारा जांच में गया, लेकिन बाद में उसे अस्वीकार कर दिया गया। अब वह भी कानूनी राहत की कोशिश कर रही हैं।
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