हाल ही में सरकार द्वारा लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद बाजार और सोशल मीडिया में कई तरह की अटकलें तेज हो गई थीं। इनमें दावा किया जा रहा था कि सरकार घरों और मंदिरों में रखे सोने को आर्थिक प्रणाली में लाने की योजना बना सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
मंगलवार को वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देशभर के मंदिरों, ट्रस्टों या किसी भी धार्मिक संस्थान के पास मौजूद सोने के मुद्रीकरण (monetisation) की सरकार की कोई योजना नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की खबरें पूरी तरह गलत, भ्रामक और निराधार हैं।
सरकार ने यह भी साफ किया कि मंदिरों के शिखरों, दरवाजों या अन्य संरचनाओं पर लगे सोने को भारत के रणनीतिक स्वर्ण भंडार के रूप में देखे जाने का दावा भी तथ्यहीन है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर भरोसा न करें और न ही इन्हें आगे फैलाएं, क्योंकि इससे अनावश्यक भ्रम पैदा होता है।
अफवाहों से बचने की अपील
वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार की किसी भी नीति या योजना से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी वेबसाइटों और अधिकृत संचार माध्यमों के जरिए ही साझा की जाती है। इसलिए लोगों को केवल भरोसेमंद स्रोतों पर ही विश्वास करना चाहिए।
भारत में सोने का अनुमानित भंडार
गौरतलब है कि भारत में सोने की बड़ी मात्रा घरों और मंदिरों में मौजूद मानी जाती है। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक के पास करीब 880 टन सोने का आधिकारिक भंडार है, जबकि मंदिरों और निजी संग्रह को मिलाकर यह आंकड़ा 3,000 से 4,000 टन तक बताया जाता है। हालांकि, मंदिरों में रखे सोने का कोई आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।