नई दिल्ली। देश के निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक में मंगलवार को अहम घटनाक्रम सामने आया है। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे बैंक की कुछ प्रक्रियाओं और घटनाओं को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुकूल नहीं बताया।

इस्तीफे में चक्रवर्ती ने क्या कहा
15 मार्च को लिखे गए इस्तीफे पत्र में चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बैंक में जो बदलाव और हालात देखे, वे उनके सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थे। इसलिए उन्होंने तुरंत पद छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई अन्य कारण नहीं है। हालांकि, अपने पत्र में किसी विशेष घटना या मामले का उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन गवर्नेंस और आंतरिक प्रक्रियाओं पर उनकी टिप्पणी बैंक के संचालन पर सवाल खड़े कर सकती है।

अतनु चक्रवर्ती ने अपने पत्र में बोर्ड और प्रबंधन का सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया और मिडिल व जूनियर स्तर के कर्मचारियों की मेहनत और क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यही टीम भविष्य में बैंक को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

बैंक में शामिल हुए 2021 में
अतनु चक्रवर्ती मई 2021 में एचडीएफसी बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे। उनके कार्यकाल के दौरान ही बैंक का एचडीएफसी लिमिटेड के साथ ऐतिहासिक विलय हुआ। इस विलय के बाद बैंक देश का दूसरा सबसे बड़ा कर्जदाता बनकर उभरा, हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि इस विलय के पूरे लाभ अभी सामने आने बाकी हैं।

बैंक का बयान और केकी मिस्त्री की नियुक्ति
एचडीएफसी बैंक ने 18 मार्च को आधिकारिक बयान जारी कर चक्रवर्ती के इस्तीफे की पुष्टि की और उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। बैंक ने कहा कि उनके द्वारा बताए गए कारणों के अलावा कोई अन्य वजह नहीं है।

इस्तीफे के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने केकी मिस्त्री को 19 मार्च 2026 से तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया।

यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब देश के बड़े वित्तीय संस्थानों में कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर लगातार निगरानी बढ़ी हुई है। नैतिक असंगति का हवाला देते हुए दिया गया यह कदम बाजार और निवेशकों के बीच कई सवाल पैदा कर सकता है।