नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ी पहल की है। आईआरसीटीसी पोर्टल से 3 करोड़ से अधिक फर्जी अकाउंट हटा दिए गए हैं, जबकि 13 हजार से अधिक संदिग्ध ईमेल डोमेन भी ब्लॉक किए गए हैं।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि पिछले वर्ष 4.07 लाख संदिग्ध पीएनआर से जुड़े मामलों में 408 साइबर क्राइम शिकायतें दर्ज की गईं। इन कदमों से दलालों पर अंकुश लगा है और आम यात्रियों को टिकट प्राप्त करने में आसानी हुई है।
फर्जी अकाउंट हटाने से ऑनलाइन बुकिंग मजबूत
वर्ष 2025 के दौरान आईआरसीटीसी ने 3.04 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी को निष्क्रिय किया। साथ ही 2.94 करोड़ खातों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जिनमें से 1.80 लाख से अधिक खातों को जांच के बाद दोबारा सक्रिय किया गया। एंटी-बॉट तकनीक की मदद से करीब 64 प्रतिशत संदिग्ध ट्रैफिक को रोका जा रहा है।
रेल मंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के फरवरी तक कुल 48.25 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हो चुके हैं, जो कुल आरक्षित टिकटों का लगभग 88 प्रतिशत है। वहीं, काउंटर से केवल 6.15 करोड़ टिकट बुक हुई हैं। यह दर्शाता है कि यात्रियों में डिजिटल बुकिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
कालाबाजारी पर कड़ा नियंत्रण
टिकट बुकिंग को निष्पक्ष बनाने के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। 1 जुलाई 2025 से तत्काल टिकट और सामान्य आरक्षण की शुरुआती बुकिंग केवल आधार सत्यापित यूजर ही कर सकते हैं। इससे फर्जी अकाउंट के जरिए भारी बुकिंग पर रोक लगी है।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे की प्राथमिकता सस्ती और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। इन उपायों से वास्तविक यात्रियों को टिकट आसानी से मिल रहे हैं और टिकट कालाबाजारी पर भी लगाम लगी है। उन्होंने बताया कि कोच संरचना में लगभग 70 प्रतिशत डिब्बे जनरल और स्लीपर श्रेणी के हैं, जबकि 78 प्रतिशत सीटें नॉन-एसी वर्ग में हैं।
रेलवे का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। यात्रियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर सुधार किए जा रहे हैं, ताकि हर यात्री आसानी और पारदर्शिता के साथ टिकट बुक कर सके।