खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच देश में एलपीजी सप्लाई को लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आ रही थीं। मंगलवार देर रात सोशल मीडिया और कुछ प्लेटफॉर्म पर यह चर्चा तेजी से फैल गई कि गैस सिलेंडर की बुकिंग से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया गया है। इन खबरों में दावा किया जा रहा था कि डबल सिलेंडर रखने वाले उपभोक्ता अब 35 दिन बाद ही बुकिंग कर सकेंगे, जबकि सिंगल सिलेंडर वाले उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 45 दिन का अंतराल तय किया गया है। इन दावों के चलते लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई थी।
हालांकि सरकार ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। सरकार की फैक्ट-चेक इकाई प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर स्पष्ट किया कि एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से जुड़े नियमों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक अभी वही नियम लागू हैं जो पहले से चल रहे थे। शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता एक बार सिलेंडर लेने के बाद अगली बुकिंग 25 दिन के अंतराल के बाद ही कर सकते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन तय है। गांवों में यह नियम सभी उपभोक्ताओं पर समान रूप से लागू होता है, चाहे उनके पास सिंगल सिलेंडर कनेक्शन हो या डबल।Clarification: LPG Refill Booking Timings
— Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) March 25, 2026
Reports circulating in sections of the news and on social media about changes in LPG refill booking norms are incorrect.
There is no change in LPG refill booking norms.
• Minimum gap between two refill bookings remains:
– 25 days in… pic.twitter.com/QqTlQYPaHp
पीआईबी ने यह भी साफ किया कि डबल सिलेंडर वाले ग्राहकों या प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए किसी नए नियम की घोषणा नहीं की गई है। सोशल मीडिया पर चल रही इस तरह की खबरें केवल अफवाह हैं और इन पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों के कारण घबराकर गैस सिलेंडर की अनावश्यक बुकिंग न करें। ऐसी पैनिक बुकिंग से सप्लाई सिस्टम पर बेवजह दबाव बढ़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि देश में एलपीजी के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और फिलहाल किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है।
ऐसे में आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों से दूरी बनाए रखें। सही और प्रमाणिक जानकारी के लिए सरकारी प्लेटफॉर्म और विश्वसनीय स्रोतों को ही प्राथमिकता देना बेहतर है।