नई दिल्ली। देश के बड़े हिस्से में एक बार फिर भीषण गर्मी और लू ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में हालात गंभीर बने हुए हैं, जहां तापमान लगातार 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण हीटस्ट्रोक और अन्य गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में लू की स्थिति बनी रह सकती है। विभाग के अनुसार, तापमान में फिलहाल किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और अधिक बढ़ सकते हैं।

लू से बढ़ते मौतों के आंकड़े

हाल के वर्षों में देश में हीटवेव से होने वाली मौतों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में लू लगने से 1,832 लोगों की मौत हुई, जो पिछले कई वर्षों में सबसे अधिक आंकड़ों में से एक है। इससे पहले 2015 में 1,908 मौतें दर्ज की गई थीं।

कोरोना महामारी के दौरान 2021 में यह आंकड़ा घटकर 374 तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद फिर से गर्मी से होने वाली मौतों में वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अत्यधिक तापमान में रहना शरीर के लिए घातक साबित हो रहा है।

पुरुषों पर ज्यादा असर

आंकड़े यह भी बताते हैं कि लू का असर सभी वर्गों पर समान नहीं है। पुरुषों में गर्मी से होने वाली मौतें महिलाओं की तुलना में अधिक दर्ज की गई हैं। विशेषकर 30 से 44 और 45 से 59 वर्ष की उम्र के कामकाजी वर्ग में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मुख्य कारण बाहरी कामकाज, धूप में लंबे समय तक रहना और शारीरिक श्रम से जुड़ी गतिविधियां हैं। यही वजह है कि कामकाजी पुरुष इस तरह की परिस्थितियों में अधिक जोखिम में रहते हैं।

29 मई के बाद मिल सकती है राहत

मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 29 मई के बाद तापमान में धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे कुछ राहत मिलने की संभावना है। हालांकि तब तक लू का खतरा बना रहेगा।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में ऐसी भीषण गर्मी की घटनाएं और अधिक सामान्य हो सकती हैं। ऐसे में सावधानी और सुरक्षा उपायों का पालन बेहद जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय तक धूप में काम करते हैं।