भारतीय मुद्रा रुपया हाल के दिनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है। रुपये की लगातार कमजोरी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर जल्द ही भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर दिखाई दे सकता है।
राहुल गांधी के अनुसार सरकार हालात सामान्य बताने की कोशिश कर रही है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग हो सकती है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जो आने वाले समय में महंगाई बढ़ने का संकेत है।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यह भी कहा कि चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि ईंधन महंगा होने से उत्पादन और परिवहन की लागत बढ़ेगी, जिसका असर बाजार में मिलने वाली रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ेगा।
MSME और शेयर बाजार पर पड़ सकता है असर
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि लागत बढ़ने से इन उद्योगों के लिए काम करना मुश्किल हो सकता है और इसका असर रोजगार पर भी पड़ सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से निवेश निकाल सकते हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
पश्चिम एशिया के तनाव का असर
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर भारत के आम परिवारों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल समय की बात है जब ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई का दबाव और बढ़ेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए स्पष्ट रणनीति की जरूरत है।
वैश्विक तनाव का भारत पर असर
गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुआ ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच तनाव पिछले तीन हफ्तों से जारी है। इस संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है।
भारत आने वाले तेल और गैस के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते गुजरना पड़ता है, जहां मौजूदा हालात के कारण चुनौतियां बढ़ गई हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों को फल और सब्जियां निर्यात करने वाले भारतीय किसानों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में जल्द शांति नहीं होती, तो इसका दीर्घकालिक आर्थिक असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है।