लगातार नए रिकॉर्ड बना रही चांदी की कीमतों को सोमवार को जोरदार झटका लगा। जैसे ही भाव ढाई लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंचे, बाजार में अचानक बिकवाली हावी हो गई। नतीजा यह रहा कि महज एक घंटे के भीतर चांदी के दाम 21 हजार रुपये से अधिक टूट गए। MCX पर मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी फिसलकर करीब 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जिससे निवेशकों में हलचल मच गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी तेज गिरावट की वजह क्या रही?

मुनाफावसूली और बदले वैश्विक संकेत

कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई फैक्टर्स के एक साथ असर का नतीजा है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते ही ट्रेडर्स ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में नरमी के संकेत मिलने से सेफ-हेवन एसेट्स की मांग कमजोर पड़ी।

MCX पर 5,000 रुपये से ज्यादा की फिसलन

खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 5 मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी करीब 2,34,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। यह पिछले सत्र की तुलना में लगभग 2.25 फीसदी या करीब 5,400 रुपये की गिरावट को दर्शाता है। इससे पहले चांदी 2,39,787 रुपये पर बंद हुई थी।

दिलचस्प बात यह रही कि कारोबारी सत्र की शुरुआत में चांदी ने जबरदस्त तेजी दिखाई और भाव 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। लेकिन दोपहर करीब एक बजे के बाद बाजार की दिशा पलट गई और कीमतें तेजी से नीचे आकर 2.34 लाख रुपये के आसपास टिक गईं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी मिला दबाव

विदेशी बाजारों में भी चांदी में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। शुरुआती कारोबार में कीमतें 80 डॉलर प्रति औंस के पार चली गईं, लेकिन बाद में 75 डॉलर से नीचे फिसल गईं। इसकी बड़ी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच युद्धविराम को लेकर सकारात्मक बयान माने जा रहे हैं। शांति वार्ता की उम्मीद बढ़ने से सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर हुई।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं

बुलियन बाजार में इस गिरावट को व्यापक प्रॉफिट बुकिंग का हिस्सा माना जा रहा है। रिलायंस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के अनुसार, चांदी का लंबी अवधि का रुख अभी भी मजबूत है, लेकिन आगे उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। उनके मुताबिक 2.40 लाख रुपये का स्तर फिलहाल अहम सपोर्ट माना जा रहा है।

वहीं अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म BTIG ने चेतावनी दी है कि कीमती धातुओं में हालिया तेजी कुछ ज्यादा ही तेज रही है। फर्म का मानना है कि जब कीमतें इस तरह पैराबॉलिक मूव दिखाती हैं, तो अक्सर इसके बाद तेज गिरावट देखने को मिलती है। तकनीकी तौर पर चांदी अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज से करीब 89 फीसदी ऊपर थी, जो ऐतिहासिक रूप से जोखिम का संकेत देता है।

इतिहास से सबक

BTIG के एनालिस्ट जोनाथन क्रिन्स्की ने 1987 का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी चांदी ने मल्टी-मंथ हाई पर एक दिन में करीब 10 फीसदी की छलांग लगाई है, उसके बाद 25 फीसदी तक की गिरावट भी देखी गई है। ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के CIO (फिक्स्ड इनकम) मनीष बंथिया का भी मानना है कि इतनी तेज रैलियां आमतौर पर धीरे नहीं, बल्कि अचानक ठंडी पड़ती हैं।

आगे का रास्ता

हालांकि तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। केडिया एडवाइजरी के मुताबिक गिरावट के बाद चांदी ने 80 डॉलर के आसपास मजबूत रिकवरी के संकेत भी दिए हैं। मध्य-पूर्व में तनाव, अमेरिका-वेनेजुएला के बीच तनातनी और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कीमतों को सहारा दे सकती हैं।

लंबी अवधि में सप्लाई की कमी, कम इन्वेंट्री और औद्योगिक मांग चांदी के लिए सकारात्मक कारक बने हुए हैं। लेकिन फिलहाल निवेशकों को तेज उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना होगा—यही मौजूदा बाजार की सच्चाई है।