प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ-2025 के दौरान मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों को राहत देते हुए मुआवजा भुगतान का स्पष्ट निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने तक मामलों के निस्तारण को टालने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने मेला प्राधिकरण और जांच आयोग को आदेश दिया है कि मृतका के पति को आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। प्रयागराज निवासी उदय प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि आदेश की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि याची के मुआवजा दावे का निस्तारण 30 दिनों के भीतर किया जाए और मामले में अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई, 18 फरवरी को पेश की जाए। उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी 2025 की रात संगम क्षेत्र में हुई भगदड़ में कई श्रद्धालकों की मौत हो गई थी।
इससे पहले 6 जून 2025 को मामले की सुनवाई के दौरान वेकेशन बेंच ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को अनुग्रह राशि देने में हो रही देरी पर उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि मुआवजे की घोषणा के बाद समय पर और सम्मानजनक ढंग से भुगतान करना सरकार की जिम्मेदारी है, इसमें टालमटोल अस्वीकार्य है।