भारत ने कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश की कुल उर्वरक मांग का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया। यह प्रगति उर्वरकों के आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों को सशक्त बनाने और पूरे देश में उर्वरकों की नियमित व भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
पांच वर्षों में कैसे बढ़ता गया उत्पादन?
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि बीते पांच वर्षों में घरेलू उर्वरक उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी जैसी सभी प्रमुख श्रेणियों में देखने को मिली है।
उत्पादन के आंकड़े इस प्रकार रहे—
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2021: 433.29 लाख टन
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2022: 467.87 लाख टन
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2023: 507.93 लाख टन
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2024: 509.57 लाख टन
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2025: 524.62 लाख टन (अब तक का सर्वोच्च स्तर)
मंत्रालय का कहना है कि यह सतत वृद्धि देश के उर्वरक निर्माण ढांचे की मजबूती और सरकारी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है।
नीतिगत फैसलों से मिली मजबूती
सरकार ने इस सफलता का श्रेय समयबद्ध और दूरदर्शी नीतिगत निर्णयों को दिया है। वैश्विक बाजार में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं से निपटने के लिए कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर रणनीतिक विविधीकरण अपनाया गया। इसके साथ ही प्रमुख संसाधनों के लिए दीर्घकालिक समझौतों को प्राथमिकता दी गई।
घरेलू उत्पादन बढ़ने के प्रमुख कारण
घरेलू उर्वरक उत्पादन में इज़ाफा कई ठोस कदमों के चलते संभव हो सका, जिनमें—
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नए उर्वरक संयंत्रों की स्थापना
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बंद पड़ी इकाइयों का पुनः संचालन
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स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा
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कच्चे माल की स्थायी और सुनिश्चित आपूर्ति
सरकार ने दोहराया है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप उर्वरक सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर, किफायती और गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट उपलब्ध कराना है, ताकि टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा मिल सके। यह उपलब्धि न केवल कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है, बल्कि वैश्विक संकटों के बीच भारत की स्थिति को भी सुदृढ़ बनाती है।