तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने दावा किया है कि अमेरिका ने लगभग दो महीने से ईरानी बंदरगाहों पर लागू समुद्री नाकेबंदी को हटा लिया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच एक अहम समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने वाले हैं।

सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तख्त-रवांची ने कहा कि समुद्री प्रतिबंध हटाना ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल था और अब इस दिशा में प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि औपचारिक समझौते से पहले ही प्रतिबंधों में ढील दी जा रही है।

दो महीने से जारी थी बंदिश

ईरान का आरोप रहा है कि अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उसके बंदरगाहों से व्यापार, तेल निर्यात और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। ईरानी मीडिया के अनुसार, हाल ही में कुछ तेल टैंकर और मालवाहक जहाजों को प्रतिबंधों के बावजूद ईरान पहुंचने में सफलता मिली है, जिसे तनाव में कमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका-ईरान समझौते की ओर बढ़ते कदम

इस बीच, अमेरिका और फ्रांस ने ईरान के साथ संभावित समझौते को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है। G7 सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस पहल को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम बताया।

मैक्रों ने कहा कि यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों को सुलझाने में मदद कर सकता है और क्षेत्र में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर

राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो रही है। उनके अनुसार, यह मार्ग जल्द ही पूरी तरह सामान्य हो सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

वैश्विक बाजार को राहत की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री प्रतिबंधों में ढील जारी रहती है और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है। अब सभी की नजर शुक्रवार को होने वाले औपचारिक समझौते पर टिकी है, जो अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में कमी की दिशा तय कर सकता है।