नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी में कार्तिगई दीपम और धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रहे विवाद में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को कायम रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पहाड़ी के नेल्लीथोप्पु इलाके में मुस्लिम समुदाय रमजान और बकरीद के दौरान नमाज अदा कर सकते हैं, लेकिन हर दिन नियमित रूप से वहां नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है।

थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की तलहटी में भगवान सुब्रमण्य स्वामी का मंदिर स्थित है और यह पहाड़ी हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए पवित्र मानी जाती है। पहाड़ी पर इसी मंदिर के साथ सिकंदर बादुशा औलिया दरगाह भी है। इसी वजह से पहाड़ी पर रोज़ाना नमाज और पशु बलि को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है।

हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने बताया संतुलित
मद्रास हाईकोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में अपने आदेश में पहाड़ी में पशुओं की बलि पर रोक लगा दी थी। दरगाह के एक इमाम ने हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वाराले की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए इसे संतुलित माना।

बीते साल दिसंबर में मद्रास हाईकोर्ट ने दरगाह के पास दीपाथून क्षेत्र में दीप प्रज्वलित करने की अनुमति दी थी, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ। राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए आदेश को लागू नहीं किया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की थी।

तमिलनाडु सरकार ने अवमानना आदेश के खिलाफ लेटर पेटेंट अपील दायर की थी, जिसे डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। राज्य सरकार, पुलिस, दरगाह और तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने भी एकल जज के आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी। अंततः 6 जनवरी को जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने एकल जज का आदेश बरकरार रखा।