कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह इतिहास को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि हालिया संसदीय बहसों के दौरान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज किया गया, बल्कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से जुड़ी विरासत को भी गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश हुई।

कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा बयान में आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार योजनाबद्ध ढंग से महात्मा गांधी से जुड़ी स्मृतियों और मूल्यों को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने संसद में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों की बातें कई सवाल खड़े करती हैं।

नेताजी और टैगोर का जिक्र

जयराम रमेश ने कहा कि 23 जनवरी 2026 को देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, लेकिन संसद में हुई बहस में उनके ऐतिहासिक योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने याद दिलाया कि 1937 में वंदे मातरम की पंक्तियों को लेकर उठे विवाद को सुलझाने में नेताजी की अहम भूमिका रही थी।

उन्होंने यह भी बताया कि नेताजी के परपोते और इतिहासकार सुगत बोस के अनुसार, 2 नवंबर 1942 को बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर के उद्घाटन के दौरान ‘जन गण मन’ गाया गया था। वहीं 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से प्रसारित संदेश में नेताजी ने पहली बार महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ कहा था।

गांधी की विरासत पर सवाल

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार महात्मा गांधी की विरासत को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसे कानूनों में बदलाव या उन्हें कमजोर करने की कोशिश इसी सोच का हिस्सा है।

संसद में गरमाई बहस

पिछले महीने संसद के शीतकालीन सत्र में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा हुई थी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल में चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर इतिहास को नए सिरे से लिखने और राष्ट्रगीत के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

इसके जवाब में सत्तापक्ष ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और राष्ट्रीय भावनाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।