शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस के विधायक कमलेश ठाकुर और संजय रतन ने अपनी ही सरकार पर सड़क निर्माण और कंपनी की लापरवाही को लेकर सवाल उठाए।

देहरा क्षेत्र में अधूरी सड़कें

देहरा से विधायक और मुख्यमंत्री की पत्नी कमलेश ठाकुर ने विधानसभा में बताया कि उनके क्षेत्र की पांच सड़कों का काम अधूरा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ की एक कंपनी, जिसे सड़क निर्माण का ठेका मिला है, इस काम के प्रति गंभीर नहीं है और काम में देरी के कारण इलाके में अव्यवस्था फैल गई है। धूल-मिट्टी के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

विधायक ने यह भी कहा कि कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे केमिकल्स का स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

संजय रतन का आरोप

ज्वालामुखी से कांग्रेस विधायक संजय रतन ने बताया कि जिस कंपनी को हिमाचल में 26 सड़कों का ठेका मिला है, उसे पहले उत्तराखंड में ब्लैकलिस्ट किया गया था। इस कंपनी ने कार्यों को आउटसोर्स किया है और उनके अनुसार, कंपनी की लापरवाही के कारण उन्हें तीन बार पुलिस केस भी दर्ज कराना पड़ा।

संजय रतन ने हिमाचल के स्थानीय ठेकेदारों को काम देने की पैरवी करते हुए कहा कि चंडीगढ़ की कंपनी से अधिक ठेके लेने के बजाय काम स्थानीय ठेकेदारों को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी उच्च अधिकारियों के साथ सेटिंग कर समय सीमा बढ़वा रही है, लेकिन काम पर ध्यान नहीं दे रही।

सरकार का जवाब

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कंपनी के कामकाज की जांच के लिए प्रधान सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। अगर कमेटी की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई, तो टेंडर रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीते दिनों भी कंपनी पर जुर्माना लगाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक स्थिति को समझे बिना पंजाब के कई लोग ठेके ले रहे हैं। बड़ी मशीनों से खुदाई के कारण कई जगह भूमि हिल रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कंपनी की क्षमता के आधार पर केवल एक या दो सड़कें ही अधिकतम दी जाएंगी।