पटना। राज्यसभा में चुनावी प्रक्रिया और मतदान अधिकार को लेकर जोरदार बहस हुई, जिसमें अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने बिहार का उदाहरण देते हुए गंभीर चिंता जताई। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र के बुनियादी अधिकार अब खतरे में हैं।
राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद उठे सवाल
कमल हासन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने विशेष समीक्षा प्रक्रिया (SIR) का जिक्र करते हुए बताया कि बिहार में इस प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जो पूरे देश के लिए चेतावनी हैं।
मतदाता अधिकार पर गंभीर चिंता
हासन ने कहा कि कई मतदाता मतदान करना चाहते हैं, लेकिन उनके अधिकार की जांच पहले ही हो रही है। नाम या पता में मामूली गलती के कारण मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है, जबकि यह प्रशासनिक चूक है, मतदाता की गलती नहीं।
‘जिंदा मृतकों की भूमि’
हासन ने दावा किया कि बिहार में कई ऐसे मतदाता हैं जिन्हें जीवित होने के बावजूद मृत घोषित कर वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। उन्होंने कहा, “बिहार कई जिंदा मुर्दों की भूमि बन गया है, और यह समस्या पूरे देश में नहीं फैलनी चाहिए।”
चुनाव आयोग पर आरोप
कमल हासन ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को रोकने की बजाय इसे बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को 'जीवित मृतकों की स्पेल-चेक कहानी' करार दिया और कहा कि भाषाई विविधता वाले देश में इस तरह की कठोरता लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।
तमिलनाडु में भयावह परिणाम की चेतावनी
हासन ने चेताया कि अगर यही प्रक्रिया तमिलनाडु में लागू हुई, तो लगभग एक करोड़ लोग मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें फिर से सूची में शामिल किया जाए।
विपक्ष ने जताया समर्थन
कमल हासन के बयान का विपक्ष ने सदन में स्वागत किया। राजद सांसद मनोज झा ने भी उनसे हाथ मिलाकर समर्थन व्यक्त किया। हासन ने कहा कि लोकतंत्र केवल जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों के साथ चलती प्रक्रिया है।