नई दिल्ली। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को और अधिक पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने नई पहल की है। अब प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के अंतर्गत मिलने वाली खाद्य सब्सिडी को डिजिटल रुपये (ई-रुपये) के माध्यम से देने की शुरुआत की गई है।
इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में शुरू किया गया। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को इसका शुभारंभ किया। यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) को राशन प्रणाली से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब तक कैसे मिलती थी सब्सिडी?
अब तक लाभार्थियों को खाद्य सब्सिडी या तो अनाज के रूप में या सीधे बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए दी जाती थी। नई व्यवस्था में पात्र लोगों के लिए विशेष डिजिटल वॉलेट तैयार किया जाएगा। सरकार निर्धारित सब्सिडी राशि इसी वॉलेट में ई-रुपये के रूप में ट्रांसफर करेगी।
इस डिजिटल राशि का उपयोग केवल राशन खरीदने के लिए ही किया जा सकेगा। इससे सब्सिडी राशि के अन्य खर्चों में इस्तेमाल या दुरुपयोग की संभावना कम होगी। लाभार्थी उचित मूल्य की दुकानों पर क्यूआर कोड या कूपन कोड स्कैन कर भुगतान कर सकेंगे।
भुगतान सीधे दुकानदार के खाते में
लेनदेन पूरा होते ही सब्सिडी की रकम सीधे दुकानदार के खाते में जमा हो जाएगी और उसका डिजिटल रिकॉर्ड तुरंत दर्ज हो जाएगा। इससे भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी और देरी की समस्या घटेगी।
सरकार का मानना है कि इससे अंगूठा प्रमाणीकरण, नेटवर्क समस्या या मशीन खराब होने जैसी दिक्कतों में भी कमी आएगी, जो कई बार राशन वितरण में बाधा बनती हैं।
अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तार
पुडुचेरी के अलावा गुजरात के चार जिलों में भी इस मॉडल को लागू किया गया है। आने वाले समय में चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तार देने की तैयारी है।
80 करोड़ से अधिक लोग जुड़े
देश में 80 करोड़ से अधिक नागरिक पीडीएस व्यवस्था से लाभान्वित हो रहे हैं। ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना और राशन कार्ड के डिजिटलीकरण के बाद अब डिजिटल रुपये को शामिल करना पीडीएस ढांचे को और अधिक तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य
यदि ई-रुपये के माध्यम से सब्सिडी वितरण का यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि सब्सिडी का लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, प्रक्रिया पारदर्शी हो और भ्रष्टाचार की संभावनाएं न्यूनतम हों।