देशभर में एलपीजी की कमी को देखते हुए पेट्रोलियम कंपनियों ने उपभोक्ताओं के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब “पहले आओ, पहले पाओ” (FIFO) नियम के तहत केवल पहले से बुक किए गए सिलिंडर वितरित होने के बाद ही नई बुकिंग पर सिलिंडर उपलब्ध होंगे।

गैस एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वितरण की तिथियों के हिसाब से सूची काउंटर पर चस्पा हो, ताकि उपभोक्ता जान सकें कि कब सिलिंडर उपलब्ध होंगे और तुरंत नई बुकिंग के लिए मांग न करें। इसके अलावा, प्रत्येक एजेंसी को केवल डेढ़ दिन के स्टॉक तक ही दिया जाएगा, जिससे कालाबाजारी की संभावना कम हो।

ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव आदर्श गुप्ता के अनुसार, बुधवार देर शाम पेट्रोलियम कंपनियों ने वर्चुअल बैठक में यह दिशा-निर्देश जारी किए। बृहस्पतिवार से यह नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। साथ ही, तत्काल बुकिंग पर डिलीवरी की सुविधा भी बंद कर दी गई है। अब उपभोक्ता बुकिंग तो करा सकते हैं, लेकिन सिलिंडर केवल FIFO नियम के तहत ही मिलेगा।

कॉमर्शियल एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोलियम कंपनियों ने सिलिंडर की कीमत में 218 रुपये की बढ़ोतरी लागू कर दी है।

गेहूं कटाई के लिए डीजल की थोक खरीद पर नियंत्रण

गेहूं की कटाई के लिए अधिक मात्रा में डीजल खरीदने वाले किसानों का रिकॉर्ड पेट्रोल पंपों पर रखा जाएगा। किसानों के नाम, पता और फोन नंबर दर्ज करने के बाद ही डीजल उपलब्ध होगा। किसी भी प्रकार का भंडारण पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में एलपीजी रिटेलर्स, पीएनजी, पेट्रोलियम एसोसिएशन और गैस एजेंसी के संचालकों के साथ बैठक कर यह निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि सिलिंडर की डिलीवरी घर पर ओटीपी से ही सुनिश्चित की जाए, ताकि एजेंसी पर लंबी कतारें न लगें।

स्कूलों में गैस किल्लत से मिड-डे मील पर संकट

जिले के परिषदीय और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में बाधा आने से मिड-डे मील तैयार करने में मुश्किलें आ रही हैं। कई स्कूलों में रसोइयों को पारंपरिक चूल्हों पर खाना बनाना पड़ रहा है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता ने इस समस्या को देखते हुए जिला पूर्ति अधिकारी को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र के अनुसार जिले में 2,618 स्कूल पीएम पोषण योजना के अंतर्गत संचालित हैं, जिनमें से 2,327 स्कूलों में भोजन किचन में तैयार किया जाता है और 291 स्कूलों में स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा भोजन दिया जाता है।

18 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भी जिले में सक्रिय हैं। कई प्रधानाध्यापकों, वार्डनों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने लिखित शिकायत दी है कि गैस एजेंसियां समय पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं करा रही हैं। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों और संस्थाओं को बिना किसी बाधा के गैस सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि बच्चों के पोषण और भोजन व्यवस्था प्रभावित न हो।