मणिपुर में मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आए एक चौंकाने वाले खुलासे में पता चला है कि राहत शिविरों और अस्थायी आवासों में शरण लिए विस्थापित लोगों में अब तक 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
यह जानकारी मणिपुर सूचना आयोग के निर्देश पर गृह विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई है, जिसे आरटीआई कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक हरेश्वर गोस्वामी को सौंपा गया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के नौ जिलों में बने राहत शिविरों और प्री-फैब्रिकेटेड आवासों में कुल 731 विस्थापितों की मौत दर्ज की गई है। इनमें सबसे अधिक 248 मौतें चूराचांदपुर जिले में हुई हैं। इसके बाद बिष्णुपुर में 151, कांगपोकपी में 128, इंफाल वेस्ट में 94, काकचिंग में 60 और इंफाल ईस्ट में 25 मौतें दर्ज की ग
ईं। वहीं जिरीबाम में 13, थौबल में 11 और तेंगनौपाल में एक व्यक्ति की मौत हुई है।
हजारों लोग अभी भी शिविरों में रहने को मजबूर
आरटीआई रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हिंसा के तीन साल बाद भी बड़ी संख्या में लोग विस्थापित जीवन जी रहे हैं। 30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 43,000 से अधिक लोग अभी भी राहत शिविरों और अस्थायी घरों में रहने को मजबूर हैं।
इनमें कांगपोकपी में 15,694, बिष्णुपुर में 10,092 और चूराचांदपुर में 6,365 लोग शामिल हैं, जो अब भी सामान्य जीवन से दूर शिविरों में रह रहे हैं।
शिविरों में अप्राकृतिक मौतें भी दर्ज
दस्तावेजों के अनुसार, शिविरों में कम से कम 25 अप्राकृतिक मौतों की भी पुष्टि हुई है। चूराचांदपुर में छह मामलों में चार डूबने, एक बिजली का झटका और एक यौन उत्पीड़न से जुड़ी मौत शामिल है। यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इंफाल वेस्ट में चार अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गईं, जिनमें आत्महत्या के दो मामले, ड्रग ओवरडोज और गोली लगने से हुई एक मौत शामिल है।
स्वास्थ्य संकट गहराया
राहत शिविरों में रह रहे लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। इंफाल ईस्ट में 217 लोग गंभीर या असाध्य बीमारियों से पीड़ित बताए गए हैं, जबकि इंफाल वेस्ट में 41 और बिष्णुपुर में 26 मरीजों की स्थिति चिंताजनक है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता, दवाएं, काउंसलिंग, व्हीलचेयर, एयर गद्दे और सर्जरी के लिए आर्थिक मदद दी जा रही है।
आरटीआई के जरिए सामने आई यह रिपोर्ट मणिपुर में जारी विस्थापन संकट और राहत शिविरों की जमीनी स्थिति की एक गंभीर तस्वीर पेश करती है।