महाराष्ट्र के अकोला स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMC) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक आदिवासी महिला अपने बीमार पति को पीठ पर उठाकर अस्पताल के विभिन्न विभागों में ले जाती नजर आ रही है। इस दृश्य ने अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

वीडियो में महिला के साथ एक छोटा बच्चा भी दिखाई देता है। दावा किया जा रहा है कि उसे अपने पति के इलाज के लिए अस्पताल परिसर में बिना किसी स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की मदद के इधर-उधर जाना पड़ा। घटना सामने आने के बाद लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। संस्थान के डीन डॉ. संजय सोनोने का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर अस्पताल की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, महिला अस्पताल की निर्धारित प्रक्रियाओं से पूरी तरह परिचित नहीं थी और उसने किसी कर्मचारी या संबंधित अधिकारी से स्ट्रेचर अथवा व्हीलचेयर की मांग नहीं की थी।

डॉ. सोनोने ने बताया कि मरीज के उपचार से पहले कुछ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित महिला ओपीडी का समय समाप्त होने के बाद अस्पताल पहुंची थी और सीधे मरीज को लेकर अंदर चली गई थी।

वायरल वीडियो में यह भी आरोप लगाए गए कि कुछ कर्मचारी वीडियो रिकॉर्डिंग को रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इन दावों को भी गलत बताया है। डीन के अनुसार, उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अभी तक ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं हुई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कहीं किसी स्तर पर मरीज को आवश्यक सहायता देने में चूक तो नहीं हुई। साथ ही अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं और उनकी पहुंच की भी समीक्षा की जाएगी।

गौरतलब है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की उपलब्धता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कई बार मरीजों के परिजनों को ही उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाते देखा गया है। ऐसे में वायरल वीडियो ने एक बार फिर अस्पतालों में मरीज सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।