प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे साहस, संकल्प और राष्ट्रभक्ति के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि नेताजी का जीवन आज भी देश को मजबूत बनाने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी नेताजी को नमन किया और उनसे जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कई पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 23 जनवरी को मनाया जाने वाला ‘पराक्रम दिवस’ नेताजी के अदम्य साहस और निडर नेतृत्व की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि नेताजी की देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन करती रहेगी।
पीएम मोदी ने बताया कि नेताजी से प्रेरित होकर उन्होंने 23 जनवरी 2009 को गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ई-ग्राम विश्वग्राम योजना की शुरुआत की थी। यह योजना राज्य के आईटी ढांचे को मजबूत करने के लिए बनाई गई थी और इसकी शुरुआत हरिपुरा से हुई थी, जिसका नेताजी के जीवन से विशेष संबंध रहा है। प्रधानमंत्री ने हरिपुरा के लोगों के उत्साह और ऐतिहासिक मार्ग से निकाले गए जुलूस को याद करते हुए इसे अपने लिए अविस्मरणीय अनुभव बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि 2012 में अहमदाबाद में आजाद हिंद फौज दिवस पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें नेताजी से प्रेरित कई लोग शामिल हुए थे, जिनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी. ए. संगमा भी मौजूद थे।
बोस को भुलाने की कोशिश का जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहे लोगों के एजेंडे में नेताजी के योगदान को याद रखना नहीं था, इसलिए उन्हें भुलाने की कोशिश की गई। लेकिन उनकी सरकार का दृष्टिकोण अलग है और हर अवसर पर नेताजी के आदर्शों को देशवासियों तक पहुंचाया गया है।
उन्होंने नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने को ऐतिहासिक कदम बताया। साथ ही कहा कि वर्ष 2018 दो कारणों से खास रहा—लाल किले पर आजाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ और अंडमान-निकोबार में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ। इसी क्रम में रॉस द्वीप सहित तीन द्वीपों के नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप जैसे नाम रखे गए।
प्रधानमंत्री ने 2021 में कोलकाता स्थित नेताजी भवन के दौरे का भी उल्लेख किया और कहा कि इंडिया गेट के पास नेताजी की भव्य प्रतिमा स्थापित करना औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और उनके प्रति सम्मान का प्रतीक है।
ममता बनर्जी की मांग
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी नेताजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका लापता होना आज भी देश के लिए एक अनसुलझा रहस्य है। उन्होंने कहा कि 1945 के बाद उनके साथ क्या हुआ, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, जो बेहद दुखद है।
ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी से जुड़ी सभी राज्य स्तरीय फाइलें पहले ही सार्वजनिक कर दी हैं और अब केंद्र सरकार को भी अपने पास मौजूद सभी दस्तावेज देश के सामने रखने चाहिए।