नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों में सीवेज से दूषित पेयजल पहुंचाने की मीडिया रिपोर्टों के मद्देनजर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को दो प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया।

राजस्थान के शहरों में खतरा गंभीर
एनजीटी की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल शामिल हैं, ने कहा कि पहली रिपोर्ट में राजस्थान के कई शहरों—उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर, अजमेर और बारां—में जर्जर और पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था के कारण सीवेज का पानी पेयजल में मिलने की बात कही गई है। पीठ ने इंदौर के हालिया हादसे का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि राजस्थान के शहरों में भी इसी तरह की स्वास्थ्य त्रासदी होने की आशंका है।

ग्रेटर नोएडा और भोपाल में भी स्वास्थ्य खतरे
दूसरी रिपोर्ट में बताया गया कि ग्रेटर नोएडा (सेक्टर डेल्टा-1) के कई निवासियों को सीवेज से दूषित पानी पीने के बाद उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां हुईं। इसी रिपोर्ट में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कुछ इलाकों में पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने की बात भी कही गई है, जिसे ट्यूबवेल में सीवेज रिसाव का कारण बताया गया है।

एनजीटी ने उठाए गंभीर सवाल
ट्रिब्यूनल ने कहा कि उठाए गए मुद्दे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर हैं और यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम का उल्लंघन प्रतीत होता है।

एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों, उनके राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों से जवाब तलब किया है।