कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंत्री पर छात्रों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उनसे देश के युवाओं से माफी मांगने और अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है। राहुल गांधी ने यह बयान सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट के जरिए दिया।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में केंद्र सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार “अहंकार” में काम कर रही है और उन छात्रों को निशाना बना रही है जो निष्पक्ष परीक्षा और बेहतर रोजगार की मांग कर रहे हैं।

राहुल गांधी का तीखा आरोप

राहुल गांधी ने लिखा कि सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार अब उस स्थिति तक पहुंच गई है, जहां अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को “आतंकवादी” जैसा बताया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं और छात्रों की आत्महत्या के मामलों के बावजूद सरकार जिम्मेदारी लेने के बजाय युवाओं की आवाज दबाने में लगी है।

उन्होंने आगे कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब सरकार ने विरोध करने वालों को निशाना बनाया है। पहले किसानों को लेकर टिप्पणी की गई, फिर सवाल उठाने वालों को देश विरोधी कहा गया और अब छात्रों को गलत तरीके से संबोधित किया जा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि जो भी सरकार से सवाल पूछता है, उसे देशद्रोही बताने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने मांग की कि शिक्षा मंत्री को अपने बयान के लिए देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए और पद छोड़ देना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था छात्रों के भविष्य को कमजोर कर रही है और इसे बेहतर व पारदर्शी बनाना जरूरी है, ताकि हर बच्चे को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

शिक्षा मंत्री के बयान का संदर्भ

यह बयान उस विवाद के बाद आया है, जिसमें एक इंटरव्यू के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “देश तोड़ने वालों की बी टीम” बताया था। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में अस्वीकृत लोग अब अलग-अलग रूप में व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

एनसीईआरटी फैसले पर प्रतिक्रिया

इसी बीच, धर्मेंद्र प्रधान ने एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में आपातकाल पर अध्याय शामिल करने के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल के दौर के बारे में जानना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।