लखीसराय। नीट यूजी परीक्षा में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ होने के एक दिन बाद जांच एजेंसियां लगातार नए खुलासे कर रही हैं। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट ने परीक्षा केंद्रों की बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया था।

बायोमेट्रिक सिस्टम में मिलीभगत से घुसाए गए सॉल्वर

जांच में यह खुलासा हुआ है कि बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कुछ कर्मियों की मिलीभगत से असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया। इसी गड़बड़ी के जरिए सॉल्वरों ने परीक्षा में शामिल होकर पेपर हल किया।

मुख्य सरगना मेडिकल छात्र निकला

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक पावापुरी मेडिकल कॉलेज, राजगीर का छात्र रविशंकर बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार कर इस संगठित नकल रैकेट को संचालित किया।

गिरोह उन अभ्यर्थियों को टारगेट करता था जो किसी भी कीमत पर मेडिकल सीट हासिल करने के लिए तैयार थे।

बायोमेट्रिक स्टाफ की भूमिका पर भी सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि पटना मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष के छात्र मयंक कश्यप ने कथित तौर पर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया और फर्जी पहचान के जरिए परीक्षा केंद्रों में एंट्री दिलाने में मदद की। इस प्रक्रिया के बाद सॉल्वर असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठते थे।

अब तक 30 लोग गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें नौ सॉल्वर शामिल हैं, जो सभी मेडिकल छात्र बताए जा रहे हैं। इसके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मचारी और अन्य आरोपी भी गिरफ्त में हैं। एक मूल अभ्यर्थी की भी गिरफ्तारी हुई है।

अभी कुछ अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। पुलिस को आशंका है कि आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम तथा वित्तीय लेन-देन के बड़े खुलासे हो सकते हैं।

10–12 लाख रुपये में तय होता था सौदा

लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्रत्येक उम्मीदवार से 10 से 12 लाख रुपये तक में सौदा किया जाता था। इसमें 1 से 2 लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे, जबकि शेष रकम परीक्षा में सफलता और एडमिशन के बाद दी जानी थी।

पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन जांच कर रही है।

एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू

इस बीच केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य सह सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत के आवेदन पर संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।