नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मानसून के आगमन से पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) की तैयारियों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। बरसाती नालों की सफाई और उनसे निकाली गई गाद के निस्तारण में लापरवाही को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
24 घंटे का नियम, जमीनी हकीकत अलग
मानसून को देखते हुए विभाग की ओर से निर्देश दिए गए थे कि नालों से निकाली गई गाद को 24 घंटे के भीतर मौके से हटा दिया जाए। हालांकि, कई इलाकों में स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। राजधानी के विभिन्न हिस्सों में गाद पांच से आठ दिनों तक सड़कों और नालों के किनारे पड़ी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जलभराव और संक्रमण का खतरा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते गाद का निस्तारण नहीं किया गया तो बारिश के दौरान यह फिर से नालों में बहकर उन्हें जाम कर सकती है। इससे सड़कों पर जलभराव और गंदगी बढ़ने की आशंका है, साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
लोगों में नाराजगी, उठे सवाल
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही के कारण हालात बिगड़ रहे हैं। कुछ नागरिकों का यह भी कहना है कि हर साल यही स्थिति दोहराई जाती है, जहां बारिश के बाद नाले फिर से चोक हो जाते हैं और बाद में दोबारा सफाई के नाम पर काम दिखाकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
पुराने अनुभवों पर उठे सवाल
पिछले वर्षों के अनुभवों को देखते हुए यह आशंका भी जताई जा रही है कि भारी बारिश में गाद के दोबारा नालों में बह जाने की स्थिति में विभागीय कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में पारदर्शिता और निगरानी की कमी सबसे बड़ी समस्या बन जाती है।