नई दिल्ली। ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। बीजू जनता दल (बीजद) छोड़कर भाजपा में शामिल होने के साथ ही उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की है। उनके इस कदम को लेकर ओडिशा की सियासत में हलचल तेज हो गई है, जबकि बीजद ने उन पर निजी स्वार्थ के चलते पार्टी छोड़ने का आरोप लगाया है।

भाजपा में शामिल होने की घोषणा

इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तराखंड से लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने संकेत दिया था कि मंगलवार सुबह 11 बजे दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में एक “प्रमुख हस्ती” पार्टी में शामिल होगी। उनके इस बयान के बाद से ही राजनीतिक हलकों में नए नाम को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।

अटकलों का दौर

भाजपा में नए चेहरे को लेकर कई नामों पर चर्चा चल रही थी। ओडिशा के देबाशीष सामंतराय के अलावा पश्चिम बंगाल की एक वरिष्ठ नेता को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अंततः देबाशीष सामंतराय ने भाजपा की सदस्यता ली।

बीजद से इस्तीफा और आरोप

देबाशीष सामंतराय ने एक दिन पहले ही बीजद की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में उनकी लगातार अनदेखी की जा रही थी और उन्हें पार्टी नेतृत्व से मिलने तक का अवसर नहीं दिया जाता था।

उन्होंने यह भी कहा था कि लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक के करीबी होने के बावजूद उन्हें दरकिनार किया गया। इससे पहले भी उन्होंने नवंबर 2025 में बीजद के वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर असंतोष जताया था।

पार्टी पर गंभीर सवाल

समंतराय ने बीजद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पार्टी अब अपनी मूल विचारधारा से दूर होती जा रही है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि बीजू पटनायक की विरासत को ऐसे लोगों के हाथों में सौंपा जा रहा है जिनका उससे कोई सीधा संबंध नहीं है।