मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की 20 वर्षीय छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी (उर्फ स्नेहा) ने 20 मई को नागपुर स्थित अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मामला NEET परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद बढ़े मानसिक तनाव से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस को बाद में एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें छात्रा ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए दोबारा परीक्षा देने में असमर्थता जताई है।

परीक्षा के बाद था अच्छे भविष्य का भरोसा

किसान परिवार से आने वाली आकांक्षा ने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की थी। परिवार के अनुसार, 3 मई को NEET परीक्षा देने के बाद वह बेहद उत्साहित थी और उसे भरोसा था कि उसके 720 में से 650 से अधिक अंक आ सकते हैं। परीक्षा के बाद घर लौटकर उसने अपने पिता से कहा था कि पेपर बहुत अच्छा गया है और अब वह डॉक्टर बनेगी।

पेपर लीक की खबरों के बाद बिगड़ी मानसिक स्थिति

परिवार का कहना है कि कुछ दिनों बाद जब पेपर लीक से जुड़ी खबरें सामने आईं और 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई, तो छात्रा गहरे मानसिक दबाव में चली गई। उसे लगने लगा कि उसकी मेहनत व्यर्थ हो गई है। धीरे-धीरे वह तनाव और निराशा में डूबती चली गई।

बताया गया कि उसने खाना-पीना कम कर दिया था और खुद को परिवार से दूर रखने लगी थी।

सुसाइड नोट में भावुक शब्द

मृतका द्वारा छोड़े गए नोट में लिखा था कि वह दोबारा NEET परीक्षा देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। उसने माता-पिता से माफी मांगते हुए कहा कि पहले प्रयास में अच्छे अंक की उम्मीद थी, लेकिन दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरने का आत्मविश्वास नहीं बचा।

आर्थिक संघर्ष और परिवार की मेहनत

आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी एक किसान हैं, जिनके पास लगभग साढ़े चार एकड़ जमीन है। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उन्होंने बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए कर्ज लिया और नागपुर जाकर परिवार के साथ रहने लगे। उन्होंने रसोइए का काम भी किया ताकि बेटी की पढ़ाई जारी रह सके।

परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए लगभग तीन लाख रुपये का कर्ज लिया था और रिश्तेदारों से भी आर्थिक मदद ली गई थी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई

इस घटना पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटना देश की शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं और व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।