ग्वालियर। महज पाँच दिनों में रेबीज से तीन मौतों ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। सबसे चिंताजनक और दुर्लभ मामला दतिया जिले के छह वर्षीय मासूम हंस प्रजापति का है, जिसकी मौत तीन डोज एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाने के बावजूद हुई। इस घटना ने न केवल वैक्सीन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन की गंभीर लापरवाही को भी उजागर किया है।
आवारा कुत्तों का खतरा और भय का माहौल
शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए पहले से ही खतरे का कारण बनी हुई है। न्यू जयारोग्य चिकित्सालय में सामने आए मामले बताते हैं कि बीते पांच दिनों में ग्वालियर और टीकमगढ़ सहित तीन लोगों की मौत रेबीज से हुई।
हंस प्रजापति का मामला विशेष रूप से चिंताजनक है। डॉग बाइट के तुरंत बाद उसे एंटी-रेबीज वैक्सीन की पहली डोज 13 जनवरी, दूसरी 16 जनवरी और तीसरी 21 जनवरी को दी गई थी। चौथा डोज 10 फरवरी को लगाया जाना था, लेकिन उसके पहले ही बच्चे में रेबीज के लक्षण दिखने लगे।
लक्षण और इलाज
हंस अचानक हवा और पानी से डरने लगा, और तुरंत कमलाराजा अस्पताल ले जाया गया। हालत में सुधार न होने पर उसे दतिया अस्पताल ले जाया गया, जहां शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात उसकी मौत हो गई।
मासूम के पिता अशोक (कल्लू) प्रजापति ने बताया कि इलाज पूरी तरह डॉक्टरों की निगरानी में किया गया। डॉक्टर भी मान रहे हैं कि तीन डोज के बावजूद रेबीज होना बेहद दुर्लभ है।
डॉक्टरों और प्रशासन की प्रतिक्रिया
जयारोग्य चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने कहा कि बीते पांच दिनों में तीन मौतें हुई हैं, और सबसे गंभीर मामला हंस प्रजापति का है। उन्होंने इसे “रेयर टू रेयरेस्ट” घटना बताया और कहा कि बहुस्तरीय जांच की जाएगी। जांच में इलाज की प्रक्रिया, देखभाल और वैक्सीन की गुणवत्ता सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।
डॉ. चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि यह घटनाक्रम न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था की समीक्षा का कारण है, बल्कि आवारा कुत्तों और स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही को उजागर करता है।