राजस्थान: गिरल लिग्नाइट माइंस के श्रमिकों के समर्थन में हुए आंदोलन के दौरान सामने आए विवाद के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। इस मामले में शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रविंद्र सिंह भाटी के निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) तखत सिंह को निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई 19 मई को बाड़मेर कूच के दौरान हुई उस घटना के बाद की गई है, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

आंदोलन के दौरान सामने आई थी विवादित घटना

गिरल लिग्नाइट माइंस के श्रमिक लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इन मजदूरों के समर्थन में विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी आंदोलन में शामिल हुए थे और बाड़मेर कूच के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।

इसी दौरान एक घटना का वीडियो सामने आया, जिसमें पेट्रोल छिड़कने जैसी स्थिति दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे और मामला तेजी से तूल पकड़ गया।

प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई

पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि संवेदनशील स्थिति के दौरान पीएसओ द्वारा सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन पूरी तरह नहीं किया गया था।

इसी आधार पर विभागीय कार्रवाई करते हुए पीएसओ तखत सिंह को निलंबित कर दिया गया है।

नई तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव

बाड़मेर पुलिस अधीक्षक चुनाराम जाट के अनुसार, निलंबन के बाद विधायक की सुरक्षा में नए पीएसओ की तैनाती कर दी गई है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश भी जारी किए हैं।

वर्तमान में रविंद्र सिंह भाटी गिरल गांव में चल रहे धरने में लगातार मौजूद हैं और श्रमिकों के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

25 दिन से जारी धरना, विधायक लगातार मौजूद

गिरल लिग्नाइट माइंस के बाहर श्रमिकों का आंदोलन पिछले 25 दिनों से जारी है। स्थानीय मजदूर और ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, जिसमें विधायक भाटी भी लगातार शामिल हैं।

वे पिछले कई दिनों से धरना स्थल पर ही रात्रि विश्राम कर रहे हैं और आंदोलनकारियों के साथ डटे हुए हैं, भले ही मौसम की परिस्थितियां बेहद कठिन बनी हुई हों।

“अंत तक संघर्ष जारी रहेगा” — भाटी

धरने के दौरान विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि जनता ने उन्हें जिन उम्मीदों के साथ चुना है, वे उन्हें पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि अधिकारों और न्याय की लड़ाई है।

भाटी ने कहा कि जब तक मजदूरों और आम लोगों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।