हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर राज्य से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की। बैठक में जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली रॉयल्टी, लंबित ऊर्जा बकाया और विभिन्न विकास योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रमुख मुद्दे रहे।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा संचालित जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं की शुरुआती 12 वर्ष की अवधि पूरी हो चुकी है, उनमें राज्य को वर्तमान रॉयल्टी से अधिक लाभ मिलना चाहिए। साथ ही 180 मेगावाट क्षमता वाली बैरा-स्यूल परियोजना के 44 वर्ष पूरे होने के मद्देनजर राज्य की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का अनुरोध भी किया।
बैठक के दौरान भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े ऊर्जा बकाया का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजनाओं के निर्माण के दौरान राज्य ने विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभावों का बड़ा बोझ उठाया है, इसलिए लंबित ऊर्जा बकाया का भुगतान जल्द किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि ब्याज सहित यह राशि अब हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
सुक्खू ने शानन जलविद्युत परियोजना में हिमाचल प्रदेश के अधिकारों का भी पक्ष रखा और इस संबंध में केंद्र से सकारात्मक हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कांगड़ा में प्रस्तावित एयरो सिटी और ‘हिम चंडीगढ़’ परियोजना के विकास के लिए केंद्र से आर्थिक सहयोग मांगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के तहत कई शहरी विकास परियोजनाएं प्रस्तावित की हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में योजनाएं स्वीकृति के लिए केंद्र को भेजी जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज पहल और अमृत योजना के तहत लंबित वित्तीय सहायता जारी करने का भी आग्रह किया। बैठक में मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी मौजूद रहे।
इस मुलाकात को राज्य के ऊर्जा, शहरी विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में कई लंबित मामलों में प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।