अयोध्या श्रीराम मंदिर से जुड़े दान और संपत्ति के कथित गबन मामले के बीच एक नया और गंभीर दावा सामने आया है। धर्मसेना के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे संतोष दुबे ने आरोप लगाया है कि मंदिर निर्माण से जुड़ी 1250 पूजित शिलाएं, जो सोने, चांदी, हीरे और अष्टधातु से बनी थीं, अब गायब हैं।
संतोष दुबे ने इस संबंध में थाने में तहरीर देकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये शिलाएं पहले कारसेवकपुरम में सुरक्षित रखी गई थीं, लेकिन अब केवल साधारण मिट्टी की शिलाएं ही वहां मौजूद हैं, जबकि कीमती शिलाओं का कोई पता नहीं है।
आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक शिलाओं पर सवाल
संतोष दुबे के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन के दौरान 1989 में देशभर से श्रद्धालुओं ने पूजित शिलाएं भेजी थीं। इनमें सोने, चांदी, हीरे और अष्टधातु से बनी शिलाएं भी शामिल थीं। उन्होंने दावा किया कि इनकी देखरेख और रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को सौंपी गई थी।
उनका यह भी कहना है कि सबसे मूल्यवान शिलाओं में एक मॉरीशस से आई थी, जबकि कई व्यापारियों ने भी कीमती धातुओं से जुड़ी शिलाएं दान की थीं।
ट्रस्ट गठन और पुराने रिकॉर्ड पर भी सवाल
संतोष दुबे ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनने के बाद पुराने रिकॉर्ड में इन शिलाओं का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। उनका दावा है कि उस समय ट्रस्ट के खातों में करोड़ों रुपये तो दिखाए गए, लेकिन इन कीमती शिलाओं का कोई विवरण सामने नहीं आया।
उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भी सवाल उठाए हैं, हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चढ़ावे की गणना जारी, रोज लाखों की आमद
इसी बीच मंदिर में चढ़ावे को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर में रोजाना लगभग 18 से 20 लाख रुपये तक का चढ़ावा प्राप्त हो रहा है। इस धनराशि की नियमित गिनती की जा रही है और इसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की निर्धारित शाखा में जमा कराया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में ही करोड़ों रुपये का चढ़ावा जमा होने की जानकारी सामने आई है।