वाराणसी में मणिकर्णिका घाट से जुड़े विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। सोमवार को पाल समाज के लोगों ने घाट पर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया और रानी अहिल्याबाई अमर रहें के नारे लगाए। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करते हुए 17 लोगों को चौक थाने ले जाया गया। पुलिस के अनुसार सभी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

पूरा विवाद क्या है

दरअसल, मणिकर्णिका घाट को लेकर की जा रही टिप्पणियों और सोशल मीडिया पर फैलाए गए एआई जनरेटेड वीडियो के मामले में पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में स्थित कुंभ महादेव मंदिर का एक वीडियो मणिकर्णिका घाट का बताकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिसे पुलिस ने भ्रामक बताया है। इस मामले में चौक थाना पुलिस ने आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी व राज्यसभा सांसद संजय सिंह, पूर्णिया (बिहार) से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव समेत कुल आठ लोगों को नोटिस जारी किया है। सभी को तीन दिनों के भीतर थाने में उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले शनिवार को दो सांसदों सहित आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है।

पुलिस का पक्ष

काशी जोन के डीसीपी गौरव बंशवाल ने स्पष्ट किया कि खंडित मूर्तियों और मंदिरों को जानबूझकर मणिकर्णिका घाट से जोड़कर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि कुंभ महादेव मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है और वहां नियमित पूजा-अर्चना हो रही है। इसके बावजूद मंदिर को क्षतिग्रस्त बताकर धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ऐसे सभी पोस्ट और टिप्पणियों की जांच कर रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।