मुजफ्फरनगर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा के दौरान लगाए गए होर्डिंग और बैनरों से पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान की तस्वीर नदारद रहने का मामला अब राजनीतिक चर्चाओं में तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर उनके लगातार सामने आ रहे बयानों के बाद सियासी हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
सोमवार को दिए गए बयान के बाद मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान संजीव बालियान ने इस विषय पर काफी संक्षिप्त और संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “सबकी अपनी मर्जी है, इससे मेरा कुछ बिगड़ने वाला नहीं है।” उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है।
इससे पहले, जब उनसे होर्डिंग से तस्वीर गायब होने को लेकर सवाल पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि “जिसने फोटो हटाई है, उसी से पूछिए। मैंने सभी के लिए काम किया है।” साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यह एक सरकारी कार्यक्रम था और वर्तमान में उनके पास कोई सरकारी पद नहीं है, इसलिए उनके फोटो का होना अनिवार्य नहीं है।
लगातार सामने आ रहे इन बयानों के बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इसे भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर बदलते समीकरणों और प्राथमिकताओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि इस पूरे मामले पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजीव बालियान का रुख इस विवाद को बढ़ाने के बजाय शांत रखने की रणनीति की ओर इशारा करता है। फिलहाल यह मामला स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों पर नजरें टिकी हुई हैं।