मुजफ्फरनगर। पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक अंतरराज्यीय असलहा तस्कर गिरोह के सरगना समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 10 पिस्टल व तमंचे, भारी मात्रा में कारतूस और एक स्विफ्ट कार बरामद हुई। पुलिस के अनुसार तस्कर पंचायत चुनाव के मद्देनजर हथियार सप्लाई करने के लिए जिले में आए थे।
कैसे पकड़ा गया गिरोह
सोमवार को पुलिस लाइन के सभागार में पत्रकारों से बातचीत में एसएसपी संजय कुमार वर्मा और एसपी देहात आदित्य बंसल ने बताया कि रविवार की देर रात शाहपुर थानाध्यक्ष गजेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ कसेरवा पुलिया के पास चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान गंगनहर पटरी मार्ग से स्विफ्ट कार आती दिखाई दी। रुकने के इशारे पर तस्करों ने कार छोड़कर भागने की कोशिश की।
पुलिस ने घेराबंदी कर गिरोह के सदस्य मोहम्मद तालिब (सर्गना), आकिल, फरहान और शाहरुख को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से बिहार के मुंगेर में बनी सात पिस्टल, तीन तमंचे और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए।
गिरोह की कार्यप्रणाली और सप्लाई नेटवर्क
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि यह गिरोह पिछले चार सालों से अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है। हथियार बिहार, मेरठ, मध्य प्रदेश और दिल्ली से खरीदे जाते थे और मोटी रकम पर बेचने का काम किया जाता था। गिरोह का सरगना मोहम्मद तालिब पहले भी असलहा तस्करी में जेल जा चुका है।
गिरोह ने पंचायत चुनाव के चलते हथियार की मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर सप्लाई की योजना बनाई थी। एसएसपी ने बताया कि गिरोह हथियार खरीदार की डिमांड और जरूरत को पहले परखता था। उदाहरण के तौर पर, एक पिस्टल 40 हजार रुपये में खरीदी जाती और 70 हजार रुपये में बेची जाती, जबकि तमंचे को 6 हजार रुपये में खरीदकर 12 हजार रुपये में बेचते थे।
इस गिरोह का नेटवर्क शामली, सहारनपुर, बिजनौर और मुजफ्फरनगर में फैला हुआ था।
सरगना का दिखावटी व्यवसाय
एसएसपी ने बताया कि गिरोह का सरगना मोहम्मद तालिब अपने गांव में डेरी चलाता है और उसके पास लगभग 80 बीघा जमीन व 10 से अधिक भैंस हैं। दिखावे के लिए यह दूध का व्यवसाय करता था, जबकि असली काम हथियार तस्करी का गिरोह चलाना था।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े हथियार खरीदारों की कुंडली भी खंगाल रही है। तस्करों की बरामद कार पर एक राजनीतिक पार्टी का स्टीकर लगा होने के कारण एसएसपी ने जांच के निर्देश दिए हैं।