अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की प्रतिबंध राहत या जब्त संपत्तियों की वापसी तभी संभव होगी, जब तेहरान भविष्य के समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन करेगा। एक टीवी इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पहले ईरान की प्रतिबद्धता और व्यवहार को परखेगा, उसके बाद ही आगे की रियायतों पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने संकेत दिया कि वॉशिंगटन जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के पक्ष में नहीं है। ट्रंप के अनुसार, ईरान को पहले यह साबित करना होगा कि वह समझौते की शर्तों का सम्मान करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए गंभीर है।

लेबनान को समझौते से जोड़ने की नहीं है मांग

मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल किसी संभावित समझौते में लेबनान को शामिल करने की शर्त नहीं रख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि क्षेत्र के कुछ पक्ष ऐसी व्यवस्था को पसंद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य फोकस मौजूदा तनाव को कम करने और स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।

परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तों की वकालत

ट्रंप ने जोर देकर कहा कि भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते का उद्देश्य केवल परमाणु हथियारों के विकास को रोकना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ईरान भविष्य में ऐसी क्षमता हासिल न कर सके। उन्होंने दावा किया कि वार्ता के दौरान कई अहम बिंदुओं पर प्रगति हुई है और संवर्धित यूरेनियम के निपटान जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।

उन्होंने कहा कि यदि समझौता सफल रहता है, तो अमेरिका और ईरान मिलकर संवर्धित यूरेनियम को हटाने और निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पर काम कर सकते हैं।

कूटनीति विफल हुई तो कार्रवाई के संकेत

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि वार्ता फिलहाल निर्णायक मोड़ पर है और समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बातचीत असफल रहती है, तो अमेरिका अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। उनके अनुसार, कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका कोई समझौता नहीं करेगा।

ईरानी नेतृत्व को लेकर भी दिया बयान

ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह उनसे बातचीत करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने उनके ठिकाने को लेकर सीधे तौर पर कोई जानकारी देने से इनकार किया, लेकिन यह संकेत जरूर दिया कि अमेरिकी प्रशासन के पास इस संबंध में पर्याप्त सूचनाएं हो सकती हैं।

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि हाल के तनाव और सैन्य घटनाक्रमों के बावजूद युद्धविराम व्यवस्था फिलहाल कायम है। उन्होंने यह भी दोहराया कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को रक्षात्मक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।