अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गठित एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मंगलवार सुबह शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट को अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंपा गया, जिसके बाद इसे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की तैयारी है।
एसआईटी टीम में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन करीब 11 बजे शासन पहुंचे और गोपनीय रिपोर्ट सौंपी। जांच में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों, कमीशनखोरी और नियुक्तियों में अनियमितताओं के संकेत मिलने का दावा किया गया है।
सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के कामकाज और चढ़ावा गणना प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में यह आशंका जताई गई है कि कर्मचारियों की नियुक्ति और धन गणना प्रणाली में भी हेरफेर किया गया। रिपोर्ट में कई गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों का उल्लेख भी किया गया है।
प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। जिन नामों पर विशेष रूप से नजर गई है, उनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और निर्माण कार्य से जुड़े गोपाल राव शामिल बताए जा रहे हैं। इनके अलावा कुछ करीबी रिश्तेदारों और सहयोगियों का भी जिक्र जांच में किया गया है।
सूत्र बताते हैं कि करीब 25 से 30 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। अनिल मिश्रा पर कमीशन लेने के आरोपों का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। फिलहाल इसे प्रारंभिक रिपोर्ट बताया गया है और एसआईटी का कहना है कि विस्तृत जांच अभी जारी है, जो अगले दो सप्ताह में पूरी हो सकती है।