लखनऊ। प्रदेश सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। नेयवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (एनयूपीपीएल) को झारखंड की पछवारा साउथ कोल खदान के विकास के लिए 2,242.90 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी गई है। इस कोयले का उपयोग कानपुर स्थित घाटमपुर तापीय परियोजना में किया जाएगा, जिससे अब कोयला दूर-दराज से लाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
उत्पादन लागत में होगी कमी
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि वर्तमान में बिजली उत्पादन की लागत 3.71 रुपये प्रति यूनिट है। लेकिन इस खदान से कोयला मिलने के बाद यह लागत घटकर 2.72 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी। इससे प्रदेशवासियों को सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
परियोजना का स्वरूप और वित्तीय प्रबंधन
यह परियोजना उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और एनएलसी इंडिया लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित की जा रही है। स्वीकृत राशि का 70 प्रतिशत यानी 1,570.03 करोड़ रुपये ऋण के माध्यम से और शेष 30 प्रतिशत अंशपूंजी के रूप में जुटाया जाएगा। इसमें उत्पादन निगम की 49% हिस्सेदारी के अनुसार 329.71 करोड़ रुपये का अंशदान शामिल है।
खदान से उत्पादन और समयसीमा
खदान से कोयले की निकासी का लक्ष्य अगस्त 2026 से निर्धारित किया गया है। परियोजना के पूरा होने के बाद बिजली उत्पादन लागत में कमी आएगी और राज्य में बिजली आपूर्ति और अधिक किफायती और स्थिर बनेगी।