अपने जन्मदिन पर मीडिया से बातचीत में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें बसपा की पुरानी योजनाओं को केवल नाम बदलकर चला रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी दल बसपा को तोड़ने और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

मायावती ने कहा कि कांग्रेस, बीजेपी और अन्य जातिवादी पार्टियां अलग-अलग तरीके अपनाकर उन्हें कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन बसपा यूपी में पांचवीं बार अपनी सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने शीतकालीन सत्र में बीजेपी और कांग्रेस के विधायकों की उपेक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा ने ब्राह्मण समुदाय को समान भागीदारी दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज के हितों का बसपा सरकार पूरी तरह ध्यान रखेगी।

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा सभी जातियों और धर्मों का सम्मान करती रही है। उन्होंने पिछली सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांशीराम के निधन पर राष्ट्रीय शोक नहीं घोषित किया गया और मुस्लिम समाज समेत अन्य समुदायों के साथ अन्याय हुआ। उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकार में दंगा-फसाद नहीं हुआ और यादव समाज के हितों का भी ध्यान रखा गया।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मायावती ने कहा कि इस बार बसपा कोई कसर नहीं छोड़ने वाली। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभिन्न समाज बसपा की सरकार की अपेक्षा कर रहे हैं। ईवीएम में संभावित गड़बड़ी और बेईमानी पर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि गठबंधन से बसपा को नुकसान होता है, खासकर अपर कास्ट वोट जातिवादी पार्टियों को चला जाता है। इसलिए भविष्य में बसपा सभी चुनाव अकेले ही लड़ेगी। जब अपर कास्ट के वोटों का भरोसा मजबूत हो जाएगा, तभी गठबंधन पर विचार किया जाएगा, लेकिन इसमें अभी सालों का समय लग सकता है।