यमुना एक्सप्रेस-वे पर बलदेव क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 8 बसों में सवार 19 लोगों की पहचान तो हो चुकी है, लेकिन दो यात्रियों की मौत से जुड़े हालात अब भी स्पष्ट नहीं हो सके हैं। बस में सफर कर रही महिला पार्वती और एक बस के कंडक्टर गोलू के अवशेष अब तक नहीं मिल पाए हैं। डीएनए जांच के बावजूद दोनों के नमूनों का किसी भी शव से मिलान नहीं हो सका, जिससे उनके परिजन लगातार भटकने को मजबूर हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अब पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
घने कोहरे में हुआ था भीषण टकराव
यह हादसा 16 दिसंबर की सुबह यमुना एक्सप्रेस-वे पर माइलस्टोन 127 के पास उस वक्त हुआ था, जब घना कोहरा छाया हुआ था। पहले तीन कारें आपस में टकराईं, जिसके बाद सात डबल डेकर बसें और आंबेडकर नगर डिपो की एक रोडवेज बस एक के बाद एक भिड़ गईं। टक्कर के बाद आग भड़क उठी, जिसमें एक कार सवार समेत कुल 19 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि करीब 100 यात्री घायल हो गए थे।
जले शवों की पहचान बनी चुनौती
हादसे के बाद कई बसों में यात्रियों के केवल जले हुए अवशेष ही मिले थे। शवों की हालत इतनी खराब थी कि पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो गया। पुलिस ने घटनास्थल से बड़ी मशक्कत के बाद 18 अवशेष एकत्र किए और हादसे में लापता सभी यात्रियों के परिजनों के डीएनए नमूने लेकर आगरा और लखनऊ स्थित फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में जांच कराई। अधिकतर मामलों में पहचान संभव हो सकी, लेकिन पार्वती और कंडक्टर गोलू का डीएनए किसी भी अवशेष से मेल नहीं खा सका।
बच्चों को बचाकर खुद आग में फंसी पार्वती
जानकारी के अनुसार, राठ (हमीरपुर) निवासी पार्वती बस में अपने दो बच्चों के साथ यात्रा कर रही थीं। हादसे के दौरान उन्होंने साहस दिखाते हुए बच्चों को बस से बाहर धकेल दिया, लेकिन खुद आग की चपेट में आ गईं। इसी तरह बाड़ी (धौलपुर) निवासी गोलू, जो एक बस में बोनट पर सो रहा था, हादसे के बाद से लापता बताया गया। दोनों के अवशेष न मिलने से उनकी मौत को लेकर सवाल बने हुए हैं।
जांच के लिए गठित हुई पांच सदस्यीय समिति
पुलिस द्वारा साक्ष्य संकलन के बाद अब प्रशासन ने विशेष जांच समिति गठित की है। इस समिति में मजिस्ट्रेट आदेश कुमार, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी, सीओ महावन संजीव कुमार राय और एआरटीओ राजेश राजपूत शामिल हैं। समिति यह जांच करेगी कि पार्वती और कंडक्टर गोलू की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई और उनके अवशेष क्यों नहीं मिल सके।
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक सुरेशचंद्र रावत ने बताया कि दोनों लापता लोगों के परिजनों से लगातार संपर्क बना हुआ है। पुलिस जांच के साथ-साथ प्रशासनिक समिति भी मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।
फोरेंसिक वैज्ञानिकों को मिलेगा सम्मान
इस बीच, बस हादसे में मृतकों की पहचान के लिए समयबद्ध और जटिल डीएनए जांच कर पुलिस की मदद करने वाले आगरा स्थित फोरेंसिक लैब के वैज्ञानिकों को सम्मानित किए जाने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, वैज्ञानिकों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में कम समय में जांच पूरी कर अहम योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें सम्मान दिया जाएगा।