लखनऊ में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का फोकस अब उन योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास पर है, जिनके जरिए जनता के बीच विकास कार्यों का संदेश मजबूती से पहुंचाया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, सभी विभागों से बड़ी परियोजनाओं की विस्तृत सूची मांगी गई है। इन रिपोर्टों के आधार पर अगले कुछ महीनों में लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों का कैलेंडर तैयार किया जाएगा। योजना है कि दिसंबर से पहले अधिकतर कार्यक्रम पूरे कर लिए जाएं, जिनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ केंद्रीय और राज्य मंत्री भी शामिल रहेंगे। कुछ अहम परियोजनाओं में प्रधानमंत्री की मौजूदगी की संभावना भी जताई जा रही है।

लोक निर्माण विभाग ने अकेले 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 22 परियोजनाओं के लोकार्पण और 18 नई परियोजनाओं के शिलान्यास की तैयारी की है। इन सभी परियोजनाओं की कुल लागत करीब 9720 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिनमें मुख्य रूप से सड़क और पुल निर्माण कार्य शामिल हैं।

इसके अलावा, पूर्वांचल क्षेत्र को जोड़ने वाले दो बड़े हाईवे कॉरिडोर के शिलान्यास की भी तैयारी चल रही है। ये कॉरिडोर कई जिलों को एक-दूसरे से जोड़कर सड़क नेटवर्क को और मजबूत करेंगे। इससे उन क्षेत्रों को भी कनेक्टिविटी मिलेगी जहां पिछले चुनावों में राजनीतिक समीकरण कमजोर रहे थे।

जानकारी के मुताबिक, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे और आगरा–लखनऊ–पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को भी आगे बढ़ाने की योजना है। साथ ही लखनऊ में प्रस्तावित विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर और नाइट सफारी परियोजना के शिलान्यास की तैयारी है, जबकि मेरठ स्थित स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का लोकार्पण प्रस्तावित है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के जरिए राज्य के सभी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा किया जाए।

सरकार का मानना है कि इन बड़े विकास कार्यों से न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि पूरे प्रदेश में विकास की गति भी और तेज होगी।