इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कम प्रदूषण, ईंधन की बचत और शहरों में स्मूद ड्राइविंग जैसी खूबियों के कारण लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। लेकिन EVs की एक खास चुनौती रही है उनका लगभग साइलेंट होना, खासकर धीमी गति पर। यही खामोशी कई बार पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और बुजुर्गों के लिए जोखिम बन जाती है, क्योंकि उन्हें गाड़ी के पास होने का अंदाजा नहीं होता।
अब इस जोखिम को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। अक्टूबर से इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहनों में लो-स्पीड पर आर्टिफिशियल साउंड (AVAS) अनिवार्य होगा।
नया नियम क्या कहता है?
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के डायरेक्टर रेजी माथाई के अनुसार, अक्टूबर से सभी नए इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहनों में अकॉस्टिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम (AVAS) अनिवार्य होगा। यह सिस्टम 0 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर गाड़ी से कृत्रिम आवाज़ पैदा करेगा, ताकि आसपास के लोग वाहन का पता लगा सकें।
AVAS कैसे काम करता है?
AVAS एक तकनीक है जो EVs को धीमी गति में हल्की-सी इंजन जैसी आवाज़ देने में सक्षम बनाती है। यह खास तौर पर पार्किंग, ट्रैफिक सिग्नल, भीड़-भाड़ वाली गलियों और रिवर्स ड्राइविंग के समय मददगार साबित होती है। इसके कारण पैदल यात्रियों और आसपास के लोगों को वाहन के आने का संकेत मिलता है।
EV की साइलेंट नेचर क्यों बनती है खतरा?
पेट्रोल-डीजल वाहन में इंजन की आवाज़ और कंपन अपने आप चेतावनी का काम करते हैं। EVs में यह प्राकृतिक संकेत नहीं होते, और कम गति पर टायर या सड़क की आवाज़ भी बहुत कम होती है। इस वजह से मोबाइल या इयरफोन इस्तेमाल करने वाले लोग, बुजुर्ग और दृष्टिबाधित व्यक्ति आसानी से हादसे का शिकार हो सकते हैं।
क्या यह नियम दोपहिया और तिपहिया EVs पर भी लागू होगा?
ARAI ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक स्कूटर और ई-रिक्शा में भी AVAS जैसे सिस्टम की जरूरत पर विचार किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल यह नियम मुख्य रूप से चार-पहिया EVs के लिए ही लागू होगा।
साउंड का वातावरण पर असर
सिस्टम ऐसा डिज़ाइन किया जाएगा कि पैदल यात्रियों को चेतावनी मिले, लेकिन शहर में अनावश्यक शोर न बढ़े। अगर हर EV तेज आवाज करने लगे, तो रेजिडेंशियल इलाके और ट्रैफिक में ध्वनि प्रदूषण बढ़ सकता है और EV का क्वाइट ड्राइविंग अनुभव प्रभावित होगा।
EV खरीदारों के लिए इसका मतलब
अक्टूबर के बाद खरीदी जाने वाली नई EVs में AVAS फैक्ट्री से लगेगा। पुराने EV मालिकों के लिए फिलहाल स्पष्ट नहीं है कि रेट्रोफिट अनिवार्य होगा या नहीं। कार कंपनियों को यह सिस्टम अपने सभी नए मॉडल्स में शामिल करना होगा। पैदल यात्रियों और आसपास के लोगों की सुरक्षा के लिए यह बदलाव अहम साबित होगा।